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एक राष्ट्र, एक चुनाव से सबसे ज्यादा छात्रों को लाभ होगा: पीपी चौधरी

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के चेयरमैन पीपी चौधरी ने दावा किया कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो इसका सबसे ज्यादा लाभ देश के छात्रों को होगा।
 

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के चेयरमैन पीपी चौधरी ने दावा किया कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो इसका सबसे ज्यादा लाभ देश के छात्रों को होगा।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का संकल्प लिया है और इस संकल्प को पूरा करने में युवा और छात्रों की अहम भूमिका होने वाली है। विकसित भारत के चार प्रमुख स्तंभ युवा, महिलाएं, अनुसूचित जाति और किसान हैं। विकसित भारत के निर्माण में इन सभी का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

पीपी चौधरी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं। समिति ने अलग-अलग हितधारकों को दिल्ली बुलाकर उनसे चर्चा की है। समिति ने भारत के छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों से बातचीत की, जिनसे कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों से भी बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि समिति ने कुल मिलाकर करीब 12 न्यायाधीशों से चर्चा की है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा कानूनी विशेषज्ञ हरीश साल्वे, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के साथ भी बातचीत की गई। समिति ने अर्थशास्त्रियों से भी चर्चा की। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों और अन्य जनप्रतिनिधियों सहित अलग-अलग हितधारकों से राय ली गई। जमीनी हकीकत के तौर पर हम कह सकते हैं कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए।

उन्होंने बताया कि समिति का उद्देश्य यह विचार करना है कि प्रस्तावित विधेयक में क्या सुझाव दिए जाएं, क्या बदलाव किए जाएं और किन महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल किया जाए, ताकि लंबे समय के लिए ऐसा कानून बनाया जा सके, जिसके तहत देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। इससे सरकार में स्थिरता आएगी, लोगों को बेहतर शासन मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान होगा।

उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के साथ एक समान मतदाता सूची की जरूरत पर भी जोर दिया।

पीपी चौधरी ने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होने से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगाई जाती है, जिससे कई बार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक साथ चुनाव होने से चुनावी प्रक्रिया में शिक्षकों की बार-बार ड्यूटी लगाए जाने की समस्या कम हो सकती है और इसका सीधा लाभ छात्रों की पढ़ाई को मिलेगा।

पीपी चौधरी ने 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावना पर कहा कि यह एक राजनीतिक कदम है, एक राजनीतिक फैसला है। यह समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। अनुच्छेद 174(2) के तहत, अगर मंत्रिपरिषद चाहे, तो वह अपनी विधानसभा को भंग कर सकती है और लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव करा सकती है, इसलिए यह समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। चाहे एनडीए हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य पार्टी, अगर वे 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराना चाहते हैं, तो ऐसा किया जा सकता है। इस पर कोई आपत्ति नहीं कर सकता।

वंदे मातरम को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसा व्यवहार किया है, जैसे उसे कानून का पालन नहीं करना है, क्योंकि वह खुद को कानून से ऊपर मानती है। संसद द्वारा पारित कानून सभी पर लागू होते हैं। कांग्रेस भी इससे अलग नहीं है। वंदे मातरम एक राष्ट्रीय गीत है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों को एकजुट करने तथा उनमें प्रेरणा पैदा करने का काम किया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम से लोगों को प्रेरणा मिलती थी और आजादी की लड़ाई में अनेक लोगों ने बलिदान दिया।

कांग्रेस पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए आजादी के 80 साल बाद भी गीत के दो पद गाने पर अड़ी है। यह दिखाता है कि कांग्रेस में देशप्रेम नहीं है। जबकि, दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए देश सबसे पहले है और कांग्रेस के लिए देश नहीं परिवार पहले है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि विपक्ष के नेता की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। आम जनता को उन पर भरोसा है कि वे देश की आवाज उठाएंगे और सरकार को जवाबदेह ठहराएंगे, लेकिन सरकार को जवाबदेह ठहराने और संसद में मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय वे संसद का बहिष्कार कर रहे हैं और संसद के बजाय सड़कों पर मुद्दे उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बेहतर होता अगर राहुल गांधी संसद में मामलों पर चर्चा करते और सरकार को जवाबदेह ठहराते। आने वाले चुनावों में कांग्रेस और राहुल गांधी को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

--आईएएनएस

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