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एक 'अबूझ पहेली' बन गई अरुण जेटली स्टेडियम की पिच

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में 27 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के खिलाफ 9 विकेट से जीत दर्ज की। डीसी को महज 75 रन पर समेटने के बाद आरसीबी ने 6.3 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया।
 
एक 'अबूझ पहेली' बन गई अरुण जेटली स्टेडियम की पिच

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में 27 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के खिलाफ 9 विकेट से जीत दर्ज की। डीसी को महज 75 रन पर समेटने के बाद आरसीबी ने 6.3 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया।

डीसी सिर्फ 3.5 ओवरों में 8 रन पर अपने 6 विकेट खो चुकी थी, जिसके बाद टीम जैसे-तैसे 75 रन तक पहुंची। इसके कुछ ही मिनटों बाद आरसीबी की पारी के दौरान यह पिच बल्लेबाजी के लिए स्वर्ग जैसी नजर आई। मैच के बाद डीसी के कप्तान अक्षर पटेल ने भी कहा कि उन्हें खुद समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या?

दिल्ली कैपिटल्स की यह खराब बल्लेबाज उस मैच के ठीक बाद आई, जब इसी पिच पर दो दिनों पहले डीसी ने ही 2 विकेट खोकर 264 रन बनाए थे। हालांकि, इसके बाद पंजाब किंग्स ने 18.5 ओवरों में 265/4 का स्कोर बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया था।

अरुण जेटली की पिच को लेकर समय-समय पर दिक्कतें सामने आई हैं। सबसे बड़ी समस्या इसकी सतह का असमान व्यवहार रही है, जहां कभी गेंद बहुत नीची रहती है तो कभी अचानक ज्यादा उछाल लेती है, जिससे बल्लेबाजों को शॉट खेलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही चोट का खतरा भी बढ़ जाता है।

कई बार पिच जरूरत से ज्यादा सूखी होने पर जल्दी टूटने लगती है, जिससे स्पिन गेंदबाजों को बहुत मदद मिलती है और मैच एकतरफा हो सकता है। वहीं कभी सतह इतनी सपाट बनती है कि गेंदबाजों को बिल्कुल मदद नहीं मिलती और सिर्फ रन बरसते हैं। आउटफील्ड और मौसम का असर भी यहां खेल पर पड़ता है, खासकर दिल्ली की गर्मी और सर्दी में।

आईपीएल इतिहास में ऐसा पांचवीं बार था, जब कोई टीम यहां 100 रन से पहले ही सिमट गई। यह आईपीएल इतिहास में इस मैदान पर किसी टीम का दूसरे न्यूनतम स्कोर भी रहा। इससे पहले आईपीएल 2017 में दिल्ली कैपिटल्स की टीम यहां मुंबई इंडियंस के विरुद्ध महज 66 रन पर ढेर हुई थी।

पुरुषों के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बात करें, तो यहां सिर्फ 5 पारियों में 200 के आंकड़े को छुआ गया है। इस बीच सबसे विशाल स्कोर 221/9 रहा, जो 9 अक्टूबर 2024 में भारत ने बांग्लादेश के विरुद्ध बनाया था।

महिलाओं के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को देखा जाए, तो यहां किसी भी टीम ने 150 रन का आंकड़ा नहीं छुआ है। इस मैदान पर महिलाओं के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बड़ा स्कोर ऑस्ट्रेलियाई टीम के नाम पर है, जिसने 30 मार्च 2016 को विमेंस वर्ल्ड कप मैच के दौरान इंग्लैंड के विरुद्ध 6 विकेट खोकर 132 रन बनाए थे।

जिस मैदान पर अनिल कुंबले ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी के सभी 10 विकेट निकाले थे। दिल्ली का वही मैदान विवादों में भी रहा है। 27 दिसंबर 2009 को इस स्टेडियम ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की छवि पर बट्टा लगाने का काम किया था। श्रीलंका और भारत के बीच खेले गए मैच के दौरान पिच इतनी खराब थी कि मुकाबले को बीच में ही रद्द करना पड़ा था। उस मैच के दौरान गेंदें पिच पर टप्पा खाकर काफी उछाल ले रही थीं, जिसके चलते कुछ खिलाड़ी चोटिल भी हुए।

श्रीलंकाई टीम 23.3 ओवरों में 5 विकेट खोकर 83 रन ही बना सकी थी। खिलाड़ियों को चोट से बचाने के लिए अंपायर ने आखिर में मैच को रद्द करने का फैसला लिया। इसके बाद आईसीसी ने इस स्टेडियम को एक साल के लिए बैन कर दिया था। बीसीसीआई ने भी पूरे मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए ग्राउंड और विकेट्स कमिटी को बर्खास्त कर दिया था।

अरुण जेटली स्टेडियम बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली इसलिए माना जाता है, क्योंकि यहां की पिच हर मैच में एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देती। कभी सतह इतनी सपाट दिखती है कि बड़े स्कोर बन जाते हैं, तो कभी अचानक गेंद रुककर आती है, नीची रहती है या अतिरिक्त उछाल लेती है। छोटी बाउंड्री होने के कारण बल्लेबाज आक्रामक खेलना चाहते हैं, लेकिन पिच की अनिश्चितता जोखिम बढ़ा देती है। यही वजह है कि यहां रन बनाने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि धैर्य, सही टाइमिंग और परिस्थितियों को जल्दी समझने की जरूरत पड़ती है।

--आईएएनएस

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