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ईडी ने मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक पर दायर की अभियोजन शिकायत

भोपाल, 28 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने 26 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल और अन्य आरोपियों के खिलाफ माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए), भोपाल में अभियोजन शिकायत दायर की है।
 
ईडी ने मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक पर दायर की अभियोजन शिकायत

भोपाल, 28 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने 26 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल और अन्य आरोपियों के खिलाफ माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए), भोपाल में अभियोजन शिकायत दायर की है।

यह कार्रवाई लोकायुक्त, भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि डॉ. अमरनाथ मित्तल ने लोक सेवक के रूप में कार्य करते हुए अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में करीब 396.67 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की। यह अतिरिक्त संपत्ति लगभग 2.38 करोड़ रुपए बताई गई थी।

पीएमएलए के तहत ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने भ्रष्टाचार से प्राप्त अवैध आय को भोपाल और रायसेन जिलों में स्थित चल तथा अचल संपत्तियों में निवेश करके मनी लॉन्ड्रिंग की। जांच एजेंसी ने कुल 9.78 करोड़ रुपए की 'अपराध से अर्जित आय' की पहचान की थी। इसी आधार पर जनवरी 2026 में डॉ. अमरनाथ मित्तल और उनकी पत्नी डॉ. अलका मित्तल की 9.79 करोड़ रुपए (लगभग) की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया था।

कुर्क की गई संपत्तियों में भोपाल और रायसेन जिलों की आवासीय और कृषि भूमि के अलावा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन बॉन्ड्स शामिल हैं। ई़डी के अनुसार, डॉ. मित्तल ने अपनी पत्नी और एचयूएफ के नाम पर भी संपत्तियां खरीदीं ताकि मालिकाना हक छिपाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि जांच अवधि के दौरान उनकी वैध आय मात्र लगभग 60 लाख रुपए थी, जबकि उन्होंने 2.98 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अर्जित की।

डॉ. अमरनाथ मित्तल मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में उच्च पद पर रह चुके हैं। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में उनके भोपाल स्थित आवास और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें भारी मात्रा में दस्तावेज और संपत्ति के सबूत मिले थे। ईडी की जांच में पाया गया कि अवैध धन को विभिन्न तरीकों से वैध संपत्तियों में परिवर्तित किया गया था।

यह मामला 2012 के आसपास लोकायुक्त द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले से जुड़ा है। ईडी ने पीएमएलए की धाराओं के तहत पूरे मामले की गहन जांच की और अब अभियोजन शिकायत दायर कर न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। विशेष पीएमएलए अदालत अब इस शिकायत पर संज्ञान लेगी।

ईडी के अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी भी जारी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ईडी की सख्त मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है।

--आईएएनएस

एससीएच