ईडी ने त्रिपुरा में अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया, 1.20 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क
अगरतला, 28 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अगरतला सब-जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक बड़े अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सख्त कार्रवाई की है। ईडी ने आरोपी देबब्रत डे, ध्रुब मजूमदार, अपु रंजन दास और उनके साथियों से जुड़ी अनामिका मजूमदार (ध्रुब मजूमदार की पत्नी) और अपु रंजन दास की लगभग 1.20 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
यह कुर्की त्रिपुरा पुलिस द्वारा दर्ज दो अलग-अलग एफआईआर के आधार पर की गई है। पहली एफआईआर पानिसागर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी, जिसमें एक वाहन के केबिन में विशेष गुप्त खानों में छिपाकर रखी गई 1,352 किलोग्राम सूखी गांजा (कैनबिस) जब्त की गई थी। दूसरी एफआईआर मुंगियाकामी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई, जिसमें 14,400 बोतलें फेनसेडिल कफ लिंक्टस बरामद हुईं, जिनमें व्यावसायिक मात्रा से कहीं अधिक कोडीन फॉस्फेट पाया गया। दोनों मामले नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटैंसेस (NDPS) एक्ट, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज हैं, जो पीएमएलए की अनुसूची में शामिल ‘अनुसूचित अपराध’ हैं।
ईडी की जांच से खुलासा हुआ कि देबब्रत डे एक आदतन ड्रग तस्कर है। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के दो अलग-अलग मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। उसने त्रिपुरा पुलिस में कार्यरत एक सेवारत अधिकारी ध्रुब मजूमदार और अपु रंजन दास समेत अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक संगठित अंतर-राज्यीय रैकेट चलाया। यह गिरोह राज्यों की सीमाओं के पार गांजा/कैनबिस और कोडीन-आधारित नशीले पदार्थों की अवैध खरीद, परिवहन और आपूर्ति करता था।
तस्करी के दौरान नशीले पदार्थों को पकड़े जाने से बचाने के लिए व्यावसायिक वाहनों में विशेष गुप्त स्थान बनाए जाते थे। भारतीय रेलवे का भी इस्तेमाल किया जाता था। इस अवैध कारोबार से प्राप्त अपराध की कमाई को आरोपियों और उनकी कंपनियों के नाम पर खोले गए कई बैंक खातों में नकद जमा किया जाता था। ध्रुब मजूमदार ने इस काली कमाई का इस्तेमाल अपनी पत्नी अनामिका मजूमदार के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में किया। अपू रंजन दास को आदतन अपराधी माना जाता है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और अदालत में बार-बार पेश न होने के कारण कई गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य व्यावसायिक वाहनों और रेल के जरिए बड़े पैमाने पर ड्रग्स की सप्लाई करते थे।
--आईएएनएस
एससीएच
