कान की सेहत से आप भी तो नहीं कर रहे खिलवाड़? बड़े काम के हैं ये टिप्स
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। कान... शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन अक्सर इसे लेकर लापरवाही की जाती है, जिसका परिणाम भी खतरनाक हो सकता है। दुनियाभर में 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 95.1 मिलियन बच्चे श्रवण हानि के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) लोगों से अपील करता है कि वे अपनी सुनने की क्षमता को बचाएं और हियरिंग हेल्थ को बढ़ावा दें। तेज आवाजों की वजह से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम अपनी और अपने परिवार की सुनने की क्षमता को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। तेज आवाजों से बचाव, नियमित जांच और सही आदतें अपनाना हियरिंग हेल्थ को मजबूत बनाने का सबसे आसान तरीका है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है तेज आवाजों से बचाव। वॉल्यूम लेवल को हमेशा 60 प्रतिशत से कम रखें। अगर आप शोर वाले माहौल में काम करते हैं या रहते हैं तो इयरप्लग का इस्तेमाल जरूर करें। इससे कान को होने वाले नुकसान से बचाव होता है।
संगीत प्रेमियों के लिए खास सलाह:- जो लोग संगीत बहुत पसंद करते हैं, उन्हें घर पर या लाइव इवेंट में सुनते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। स्पीकर से काफी दूर बैठने की जगह चुनें। कानों को समय-समय पर आराम दें और शांत जगह पर रहें। शोर वाली जगहों पर इयरप्लग लगाकर सुनें। इवेंट के बाद अपने कानों को ठीक होने के लिए एक 'शांत दिन' जरूर रखें। स्मार्टफोन ऐप्स की मदद से साउंड लेवल को मॉनिटर करते रहें।
गेमर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स: - गेमिंग करते समय भी सुनने की सुरक्षा का ध्यान रखें। ऐसे डिवाइस चुनें जिनमें सुरक्षित सुनने की सुविधा हो। बैकग्राउंड नॉइज को कम करने वाले नॉइज-कैंसलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करें। स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें ताकि लगातार हेडफोन इस्तेमाल न हो।
यही नहीं समय-समय पर अपनी सुनने की क्षमता की जांच करवाएं। अगर सुनने में कोई दिक्कत महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत पड़ने पर सुनने में मदद करने वाले उपकरण का इस्तेमाल करें। सुनने की क्षमता खो चुके लोगों का पूरा साथ दें। उन्हें समाज में सम्मान और सहयोग प्रदान करें। सुनवाई की समस्या को नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
--आईएएनएस
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