द्वापर युग का साक्षी है चमोली का यह हनुमान मंदिर, जानें क्या है इसकी पौराणिक कथा
उत्तराखंड, 17 मार्च (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड अपने कण-कण में भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं को समेटे हुए है। ऐसा ही एक पवित्र स्थान चमोली जिले में स्थित श्री हनुमान मंदिर है, जिसे हनुमान चट्टी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का संबंध द्वापर युग से जुड़ा हुआ है।
चमोली में स्थित यह हनुमान मंदिर, हनुमान चट्टी (बद्रीनाथ मार्ग) और औली के पास वाले मंदिर पौराणिक महत्व के प्रसिद्ध स्थान माने जाते हैं। ये स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राचीन कथाओं और परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "हनुमान चट्टी, चमोली स्थित श्री हनुमान मंदिर का संबंध महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर श्री हनुमान जी ने अपनी दिव्य लीला के माध्यम से भीम को विनम्रता का संदेश दिया था। आप भी चमोली आगमन पर इस पवित्र स्थल के दर्शन कर श्री हनुमान जी का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।"
हनुमान चट्टी एक धार्मिक और पौराणिक पवित्र स्थल है, जो अपने साथ पुरानी कहानियों को समेटे हुए बैठा है। इसे महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि चमोली के पास (हनुमान चट्टी के पास) हनुमान जी ने भीम को उनकी शक्ति का अहंकार तोड़ने के लिए एक वृद्ध वानर के रूप में दर्शन दिए थे। जब भीम ने हनुमान जी (जो वानर के रूप में थे) से रास्ता छोड़ने को कहा, तो हनुमान जी ने अपनी पूंछ हटने को कहा। भीम अपनी पूरी ताकत लगाकर भी हनुमान जी की पूंछ को हिला तक नहीं पाए। इस घटना से भीम को एहसास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं बल्कि हनुमान जी हैं और उनका अहंकार टूट गया।
वहीं, इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि लंका से हिमालय जाते समय हनुमान जी ने यहां पर विश्राम किया था। यह मंदिर बेहद शक्तिशाली माना जाता है और शीतकाल में देवदार के पेड़ों और बर्फ से ढका रहने के कारण यहां का वातावरण बहुत अलौकिक हो जाता है।
--आईएएनएस
एनएस/एएस
