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डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने विद्यार्थियों को दिया जीत का श्रेय, बोले-छात्रों ने मदद की और मजबूती से चुनाव लड़वाया

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उपाध्यक्ष बने दीपांशु शौकीन ने अपनी जीत का श्रेय छात्रों को दी। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने एनएसयूआई पर कई सवाल खड़े किए।
 

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उपाध्यक्ष बने दीपांशु शौकीन ने अपनी जीत का श्रेय छात्रों को दी। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने एनएसयूआई पर कई सवाल खड़े किए।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए दीपांशु शौकीन ने जीत का श्रेय छात्रों को दिया। उन्होंने कहा, "दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों में मेरी मदद की, मजबूती से चुनाव लड़वाया और मुझ पर भरोसा जताया। इसलिए इस जीत का श्रेय छात्रों को जाता है। प्रशासन की लापरवाही से सत्य निकेतन की बड़ी घटना हुई और पांच छात्रों की जान चली गई। प्रशासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता होना चाहिए।"

एनएसयूआई की हार पर दीपांशु शौकीन ने कहा, "जमीनी हकीकत को देखते हुए निर्णय लिए जाते तो शायद परिणाम अलग होते। विद्यार्थी उन्हें ही समर्थन देते हैं, जो उनके बीच रहकर बात रखते हैं।" एनएसयूआई को लेकर उन्होंने कहा कि जिनके हाथ में पूरी मैनेजमेंट थी और इसके लिए जो जिम्मेदार थे, चाहे पार्टी में प्रभारी हों या और लोग हों, उन्हें आतंरिक राजनीति को मैनेज करना चाहिए था।

एनएसयूआई की ओर से अध्यक्ष पद पर दीपांशु को चुनाव लड़वाए जाने की खबरों पर उन्होंने कहा, "यह कंफर्म नहीं था कि कौन अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहा है और कौन नहीं। निर्दलीय तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। एनएसयूआई के उम्मीदवार का नाम तय हो चुका था। ऐसे में ये कैसे कहा जा सकता है कि मुझे अध्यक्ष पद पर लड़वाए जाने की योजना थी। अगर ऊपर तक बात पहुंचती तो डिजर्विंग मैं था और डिजर्विंग को टिकट दी जाती। जिन लोगों को जिम्मेदारी मिली थी वे शायद सक्षम नहीं थे। यह बड़ा सवाल है कि किस तरह से राजनीति हुई, लोगों को आश्वसन दिया गया और आखिरी तक कुछ साफ नहीं हो पाया।

कन्हैया कुमार को लेकर दीपांशु शौकीन ने कहा, "उनको जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, वे पार्टी में इंचार्ज हैं। मेरा मानना है कि निर्णय लेने वालों में वे भी रहे होंगे। उनको क्लियर स्टैंड लेना चाहिए था और ग्राउंड पर आकर देखना चाहिए था कि कौन मजबूत है, किसकी तैयारी अच्छी है। अगर वे ग्राउंड पर आकर चीजों को देखते तो शायद रिजल्ट अलग होता।

राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर दीपांशु ने कहा, "राहुल गांधी से विद्यार्थी बिल्कुल जुड़े हुए महसूस करते हैं। वे विद्यार्थियों की आवाज बन गए हैं। हालांकि उनकी इस मुहिम को जमीन तक लेकर आना चाहिए। नीचे के लोगों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि नीचे के लोगों की बात ऊपर तक पहुंचनी चाहिए।"

एनएसयूआई के लोगों की राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाती। इस सवाल के जवाब में दीपांशु ने कहा, "मेरी दो-तीन बार उनसे मुलाकात हुई है, उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता हूं। नीचे के लोग बैरियर बन जाते हैं और आंतरिक राजनीति का शिकार होना पड़ता है।"

दीपांशु ने कहा, "मेरा साथ कई नेताओं ने दिया, जो सच के साथ खड़े थे। इस चुनाव में मैंने एक चीज सीखी कि जिसके साथ छात्र हैं, चुनाव में उनकी जीत होगी।" उन्होंने कहा कि जेन-जी नए ट्रेंड्स पर चल रही है। मेरा कहना है कि जेन-जी कनेक्शन तभी फील करता है जब उनके साथ बॉन्डिंग हो और उनके बीच में रहकर काम किया जाता है।

--आईएएनएस

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