वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम और अवसर दोनों का दौर, सही समय पर प्रभावी कदम उठाने जरूरी: जयशंकर
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से ठीक पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने दुनिया की अर्थव्यवस्था के जोखिम और अवसर के दौर में सही समय पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने मौजूद सभी मेहमानों को आभार जताते हुए कहा कि आप सभी के साथ शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह कार्यक्रम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित किया जा रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह वर्ष खास महत्व रखता है क्योंकि हम ब्रिक्स सहयोग के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इन 20 वर्षों में ब्रिक्स ने काफी प्रगति की है। इसके सदस्य देशों की संख्या बढ़ी है, इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है और सहयोग के नए तरीके विकसित हुए हैं।
भारत की अध्यक्षता के दौरान हमने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर जोर देते हुए इस विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। आज की परिस्थितियों में ये प्राथमिकताएं हमारे देशों के लिए पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
जयशंकर ने कहा कि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलताएं आज की दुनिया की प्रमुख पहचान बन गई हैं। हम भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परेशानियों के आर्थिक प्रभाव को अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं।
साथ ही, तेजी से बढ़ते डिजिटल बदलाव और नई तकनीकों की प्रगति विकास, उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि के लिए नए अवसर भी पैदा कर रही है। नतीजतन, आज दुनिया की अर्थव्यवस्था ऐसे दौर में है जहां जोखिम और अवसर दोनों अधिक व्यापक रूप से फैल रहे हैं। ऐसे माहौल में भविष्य की चुनौतियों का पहले से अंदाजा लगाने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और सही समय पर प्रभावी कदम उठाने की क्षमता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स की संभावनाओं को जमीन पर वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए व्यापार जगत की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
इस दिशा में ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और ब्रिक्स वुमेंस बिजनेस अलायंस की अहम भूमिका है। ये संस्थाएं उद्योग जगत, उद्यमियों और कारोबारी नेताओं के विचारों को ब्रिक्स की प्रक्रिया से जोड़ने का काम करती हैं और आर्थिक सहयोग के व्यावहारिक रास्ते तैयार करने में मदद करती हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम भी इसी व्यापक प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब से इस फोरम की शुरुआत 2010 में हुई थी, तब से ब्रिक्स के विस्तार के साथ-साथ व्यापारिक सहयोग का दायरा भी लगातार बढ़ा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज का यह फोरम पहले की तुलना में कहीं अधिक देशों, कंपनियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाता है। यह सिर्फ व्यापारिक अवसरों पर चर्चा करने का मंच नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों और व्यवस्थाओं पर भी विचार करने का अवसर देता है जो ऐसे अवसरों को संभव बनाती हैं। फोरम के एजेंडे में यह व्यापक दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि आज सप्लाई चेन कनेक्टिविटी और व्यापार को आसान बनाना बेहद महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं। लेकिन इसके साथ-साथ मजबूत सेवा क्षेत्र, कृषि और कृषि-तकनीक, डिजिटल सेवाएं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, स्टार्टअप्स और महिलाओं की ओर से संचालित व्यवसायों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन सभी विषयों को जोड़ने वाली एक समान सोच यह है कि हमारे देशों के व्यवसायों के लिए नए साझेदार ढूंढना, आपस में जुड़ना, सप्लाई नेटवर्क मजबूत करना और एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर नए अवसर पैदा करना कैसे और आसान बनाया जाए।
--आईएएनएस
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