डीएससी घोटाले को लेकर जगन ने सीएम चंद्रबाबू पर फिर साधा निशाना, पूछा- क्या आप जिम्मेदारी लेंगे?
अमरावती, 14 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में डीएससी (डिस्ट्रिक्ट सेलेक्शन कमेटी) के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने सोमवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है तो उम्मीदवारों के सपने भी टूट जाते हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थी निष्पक्ष अवसर की उम्मीद में अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष और अपने परिवार की मेहनत की कमाई दांव पर लगाते हैं। जब व्यवस्था उन्हें निराश करती है तो इसका असर केवल नतीजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया से उनका भरोसा टूट जाता है और उनमें निराशा पैदा होती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से सवाल किया, “निष्पक्षता कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। क्या आपको नहीं लगता कि उनकी मेहनत निष्पक्षता और भविष्य में जवाबदेही की हकदार है? क्या आप डीएससी में मौजूदा घोटाले की जिम्मेदारी लेंगे?”
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने कहा कि यह उनकी ओर से कथित अनियमितताओं को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही कई पोस्ट की कड़ी में नवीनतम पोस्ट है।
जगन लगातार डीएससी भर्ती में कथित अनियमितताओं को उजागर करते हुए मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से गहन जांच कराने और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश, जो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे हैं, के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
रविवार को एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “एक शिक्षक पद। इस डीएससी घोटाले में कई उतार-चढ़ाव।” उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि स्पष्टीकरण लगातार बदल रहे हैं और हर नया स्पष्टीकरण शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए और अधिक सवाल खड़े कर रहा है।
जगन ने एक शिक्षक की नियुक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि कथित तौर पर एक अभ्यर्थी को 65 टीईटी अंक के साथ पद आवंटित किया गया और वह सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया से गुजरा। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने अभ्यर्थी को अयोग्य बताया।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अभ्यर्थी सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया से गुजरा था तो वास्तव में उन सात चरणों में क्या सत्यापित किया गया था?
जगन ने आरोप लगाया कि मामले में एक और सवाल यह है कि अभ्यर्थी को नौकरी मिल गई, लेकिन उसे खुद इसकी जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक, संबंधित अभ्यर्थी ने कथित तौर पर कहा कि उसे पता ही नहीं कि उसे नौकरी कैसे मिली।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या इस पूरी प्रक्रिया को किसी भी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी कहा जा सकता है? क्या इससे डीएससी घोटाले को बढ़ावा नहीं मिला? और क्या मुख्यमंत्री इसकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेंगे?
इससे पहले शनिवार को भी जगन ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि शिक्षक अभ्यर्थियों का करियर उनके लिए मजाक बनकर रह गया है।
--आईएएनएस
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