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ड्रॉपआउट छात्रों को वापस शिक्षा से जोड़ेगा मंत्रालय, शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। देश में स्कूल से बाहर और स्कूल (ड्रॉपआउट) छोड़ने वाले बच्चों की पहचान की जाएगी। ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए उन्हें स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) शुरू कर रहा है।
 
ड्रॉपआउट छात्रों को वापस शिक्षा से जोड़ेगा मंत्रालय, शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। देश में स्कूल से बाहर और स्कूल (ड्रॉपआउट) छोड़ने वाले बच्चों की पहचान की जाएगी। ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए उन्हें स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) शुरू कर रहा है।

दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में वर्ष 2030 तक प्री-स्‍कूल से माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 14-18 वर्ष की आयु के लगभग 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। वहीं कक्षा 3 से 8 के लगभग 11 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर हैं। प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक छात्र बोर्ड परीक्षाओं में असफल हो जाते हैं।

शत-प्रतिशत सकल नामांकन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, इन बच्चों को जल्द से जल्द शिक्षा प्रणाली में वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए छात्रों के ड्रॉपआउट को रोकना भी आवश्यक है। आर्थिक, सामाजिक, या भौगोलिक बाधाओं के कारण नियमित स्कूलों में जाने में असमर्थ बच्चों के लिए मुक्‍त शिक्षा एक व्यावहारिक विकल्प भी प्रदान किया जा रहा है।

राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है। यह विश्व का सबसे बड़ा मुक्त शिक्षा बोर्ड भी है। यह संस्थान मुक्‍त और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा और कौशल विकास तक समावेशी और लचीली पहुंच प्रदान करता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इससे सार्वभौमीकरण, समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है। विश्व के सबसे बड़े मुक्त शिक्षा बोर्ड के रूप में, एनआईओएस लचीली प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा उत्तीर्ण करने के अनेक अवसर, ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली, रोजगार के अनुरूप व्यावसायिक और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम, दिव्यांग शिक्षार्थियों के लिए समावेशी प्रावधान और अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य बोर्डों के समकक्ष मान्यता प्राप्त प्रमाणन प्रदान करता है।

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित 'विकसित भारत 2047' की विजन को साकार करने और आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों की निगरानी और उनके सीखने के स्तर पर विशेष बल दिया गया है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे स्कूल में नामांकित व नियमित रूप से उपस्थित हों। यदि कोई बच्चा पिछड़ गया हो या छात्र स्कूल छोड़ चुके हों तो उन्हें पढ़ाई में पिछड़ने की भरपाई करने और पुन प्रवेश पाने के उपयुक्त अवसर दिए जाएंगे।

इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय, राज्यों के सहयोग से स्कूल से बाहर या ड्राप आउट बच्चों से संपर्क करने का अभियान शुरू कर रहा है। राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के जिला-स्तरीय सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों की सहायता से एनआईओएस आगामी नामांकन अभियानों के लिए ऐसे बच्चों की पहचान कर उनसे संपर्क करेगा। वंचित समूहों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, ‘एनआईओएस मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। प्रशिक्षित प्रशिक्षक स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान करेंगे और उन्हें परामर्श देंगे, उनके नामांकन में सहायता करेंगे और शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इसमें हाशिए पर रहने वाले, आदिवासी, प्रवासी, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीएससी