'दोनों मैचों में हमारा दबदबा रहा', उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बावजूद टीम के प्रदर्शन से संतुष्ट कोच एलेक्जेंडरसन
नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम के मुख्य कोच जोआकिम एलेक्जेंडरसन का कहना है कि टीम ने हाल ही में ताशकंद दौरे पर अच्छा प्रदर्शन किया और कई सकारात्मक संकेत दिखाए। इस दौरे के दौरान भारतीय टीम ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो मैच खेले, जो बिना किसी गोल के ड्रॉ रहे।
कोच का मानना है कि इन मुकाबलों से टीम को अपनी तैयारी को परखने का अच्छा मौका मिला। भारत की अंडर-17 टीम अब अगले महीने मलेशिया के कुआलालंपुर में होने वाले एएफसी अंडर-17 महिला एशियन कप 2027 क्वालिफायर की तैयारी में जुटी हुई है।
भारत की टीम ने पिछले हफ्ते यूएफए नेशनल फुटबॉल सेंटर में सेंट्रल एशिया की टीम के खिलाफ दो मैच खेले, लेकिन दोनों मुकाबले बिना किसी गोल के ड्रॉ रहे। हालांकि, कोच एलेक्जेंडरसन का मानना है कि स्कोरलाइन मैच की पूरी कहानी नहीं बताती। उनके अनुसार, भारत ने खेल के अधिकांश समय गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन अटैक के दौरान मिले अहम मौकों को गोल में नहीं बदल सकी।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि स्कोरलाइन हमारे प्रदर्शन को काफी हद तक सही दिखाती है। दोनों मैचों में हमारा दबदबा रहा, लेकिन 'फाइनल थर्ड' (विपक्षी टीम के गोल पोस्ट के पास का एरिया) में पासिंग और कॉम्बिनेशन में हम थोड़े लापरवाह रहे, जिससे हमें मिलने वाले मौकों की संख्या पर असर पड़ा।"
हालांकि, अटैक में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन स्वीडिश कोच भारत के डिफेंसिव खेल से काफी खुश थे। भारतीय टीम ने उज्बेकिस्तान को 180 मिनट तक कोई गोल नहीं करने दिया और कोच के अनुसार, टीम ने वह जोश और एकजुटता दिखाई जिस पर वे काम कर रहे थे।
हेड कोच ने बताया, "मुझे लगता है कि हमारा डिफेंसिव प्रदर्शन, खासकर, वैसा ही था जैसा मैं टीम से चाहता हूं। एक यूनिट के तौर पर हम बहुत तालमेल के साथ खेले और वैसा आक्रामक खेल दिखाया जिस पर मैंने ट्रेनिंग के दौरान बहुत जोर दिया था। यह देखना भी अच्छा रहा कि ज्यादातर खिलाड़ियों ने खेल के उस अंदाज और जोश को बनाए रखा जिसकी हम उनसे उम्मीद करते हैं।"
ताशकंद के मैचों से कोचिंग स्टाफ को यह भी साफ पता चला कि मलेशिया में 5 से 11 अक्टूबर तक होने वाले क्वालिफाइंग कैंपेन से पहले किन चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है। एलेक्जेंडरसन ने कहा कि भारत ने मौके तो बनाए, लेकिन 'फाइनल थर्ड' में मूवमेंट और फिनिशिंग में उन्हें और बेहतर होना होगा।
उन्होंने आगे कहा, "हमने दोनों मैचों में कई अच्छे 'हाफ-चांस' और कुछ बहुत क्लियर मौके बनाए, जो आम तौर पर मैच जीतने के लिए काफी होते हैं। डिफेंस के मामले में हम बहुत मजबूत दिखे और हमने गोल खाने का कोई बड़ा मौका नहीं दिया। हालांकि, क्वालिफाइंग मैचों से पहले आखिरी महीने में हमें कुछ चीजों पर काम करना है, जैसे कि क्रॉस या कटबैक देते समय बॉक्स में हमारे दौड़ने की टाइमिंग। हमें गोल के सामने थोड़ा शांत रहने की भी प्रैक्टिस करनी होगी, खासकर तब जब विरोधी खिलाड़ी शॉट को रोकने की कोशिश कर रहा हो।”
विदेश में खेले गए फ्रेंडली मैच भी भारत के अटैकिंग खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ खेलने का अनुभव देने के लिए अहम थे। टीम ने क्वालिफायर से पहले अलग-अलग विकल्पों को आजमाने के लिए इन मैचों का इस्तेमाल किया। जोआकिम एलेक्जेंडरसन ने कहा, “अटैकिंग खिलाड़ियों को खेलने का मौका देना और यह बेहतर ढंग से समझना कि वे अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ क्या कर सकते हैं, बहुत फायदेमंद रहा।”
अलेक्जेंडरसन पहले ही भारत को क्वालिफिकेशन प्रोसेस से गुजारने की चुनौतियों से वाकिफ हैं। उन्होंने पहले अंडर 17 महिला टीम को कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप के 2026 एडिशन में ऐतिहासिक जगह दिलाई थी। मौजूदा साइकल में उनका मकसद भारत को लगातार एएफसी अंडर 17 महिला एशियन कप के लिए क्वालिफाई कराना है।
ताशकंद से मिले नतीजों और टैक्टिकल सीख के अलावा, कोच को टीम के माहौल और खिलाड़ियों की सुधार करने की इच्छा से भी हौसला मिला। उन्होंने कहा, “सबसे अहम बात जो मैंने महसूस की वह यह है कि खिलाड़ी साथ में समय बिताने का सच में आनंद ले रही हैं और एक ग्रुप के तौर पर हमारे कुछ दिन बहुत अच्छे रहे। फ़ुटबॉल के नजरिए से देखें तो साफ है कि इस ग्रुप में आगे बढ़ने की जबरदस्त इच्छा है। इनमें बहुत टैलेंट भी है। अब हमें बस पूरे मैदान पर, और खासकर 'फाइनल थर्ड' में थोड़ी और टैक्टिकल समझ विकसित करने पर काम करना है। मेरा मानना है कि निकट भविष्य में हमारे पास बहुत अच्छा प्रदर्शन करने का अच्छा मौका होगा।”
--आईएएनएस
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