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दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए पेशेवर सहायता आवश्यक : जिष्णुदेव वर्मा

मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति सही अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान मिलने पर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राज्यपाल बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में शारीरिक, बौद्धिक और मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले वयस्कों द्वारा संचालित नए मिट्टी कैफे के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे।
 

मुंबई, 17 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। महाराष्‍ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति सही अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान मिलने पर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राज्यपाल बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में शारीरिक, बौद्धिक और मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले वयस्कों द्वारा संचालित नए मिट्टी कैफे के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि व्यवसायों को अपनी सीएसआर पहलों का उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए। सामाजिक परिवर्तन के लिए केवल सहानुभूति नहीं बल्कि कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्‍होंने कॉरपोरेट्स से व्यापारिक विकास को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रपति भवन, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और मुंबई, बेंगलुरु और नवी मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर मिट्टी कैफे के आउटलेट चल रहे हैं। महाराष्ट्र लोक भवन में भी इसी तरह का कैफे खोलने की संभावना तलाशी जाएगी।

मिट्टी कैफे की प्रशंसा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसी पहल विकलांग व्यक्तियों को सहायता के लाभार्थी के बजाय कुशल और उत्पादक योगदानकर्ता के रूप में मान्यता देकर समाज की उनके प्रति धारणा को बदलने में मदद करती हैं। राज्यपाल ने कैफे का पहला ऑर्डर भी दिया और टीम की पेशेवरता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र लोक भवन में भी इसी तरह का कैफे खोलने की संभावना तलाशी जाएगी।

मिट्टी कैफे की संस्थापक अलीना आलम ने बताया कि 2017 में एक छोटी सी मेज और छाते से शुरू हुई यह पहल अब भारत भर में लगभग 80 स्थानों तक फैल चुकी है। इन कैफे ने दो करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी है और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को 80 लाख से अधिक भोजन वितरित किए हैं। मिट्टी कैफे का उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, सम्मान, रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है।

--आईएएनएस

एएसएच/पीएम