दिल्ली में विपक्ष की रैली फेल, अब राहुल गांधी जंतर-मंतर पर करेंगे जादू: केशव प्रसाद मौर्य
नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई इंडिया ब्लॉक की मेगा रैली पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जमकर निशाना साधा। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि दिल्ली में विपक्ष की रैली फ्लॉप हो गई और अब राहुल गांधी जंतर-मंतर जाकर जादू करेंगे। वहीं विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने इसे राजनीतिक मकसद वाली रैली बताया। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने भी तंज कसा।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आज दिव्यांग बच्चों के लिए जो कार्यक्रम उत्तर प्रदेश और संस्कृत संस्कृति केंद्रों के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, मैं दिल से उसकी सराहना करता हूं। भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार दिव्यांगजनों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी करती रहेगी। मैंने उनसे कहा है कि जो भी मुद्दे सामने आए हैं, आज रात जब मैं सर्किट हाउस में ठहरूं तो आप मुझे लिखित में दे दें, हम उनका समाधान कराएंगे।
विश्व हिंदू परिषद के प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने कहा कि आज दिल्ली में कई बड़ी रैलियां हो रही हैं। इनमें रामलीला मैदान की रैली और कुछ लोगों द्वारा निकाला गया एक और जुलूस शामिल हैं। दोनों ही राजनीतिक मकसद से चल रहे हैं। राजनीति में आजकल ऐसा ट्रेंड बन गया है कि लोग अपनी तारीफ करते हैं, अपनी अच्छाइयों को हाईलाइट करते हैं और दूसरों की कमियां बताकर उनकी बुराई करते हैं।
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि चूंकि वरिष्ठ लोगों को इससे बचना चाहिए, मेरा मतलब है कि बेशक उन्हें अपनी पार्टी की ओर से बातचीत करने का अधिकार है। वे युवा पीढ़ी के साथ बातचीत कर सकते हैं, यह उनका काम है लेकिन साथ ही वे युवा पीढ़ी की ओर से नहीं बोल सकते, क्योंकि वे अब युवा पीढ़ी नहीं रहे। मैं खुद को मध्यम आयु की महिला कहती हूं क्योंकि आज मेरे बच्चे युवा हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे यह काफी हास्यास्पद लगता है, क्योंकि ये लोग बाधा डालने वाले हैं। ये वे लोग हैं जो संसद में जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए जनता द्वारा चुने गए हैं। जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तो ये लोग कार्यवाही में बाधा डालते हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं कहूंगी कि जो लोग संसद के सदस्य नहीं हैं, जो कभी न कभी संसद में आने की महत्वाकांक्षा रखते हैं, उन्हें वास्तव में एक मॉडल संसद चलानी चाहिए थी, न कि मॉक पार्लियामेंट, ताकि यही सांसद सीख सकें कि संसद को कैसे चलाना है और संसद के अंदर उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए लेकिन दोनों तरफ जहां कार्रवाई की जरूरत है, वहां कार्रवाई नहीं हो रही है।
--आईएएनएस
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