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दिलीप प्रभावलकर: जवानी में निभाए बुजुर्गों के किरदार, तय किया थिएटर से लेकर ऑस्कर तक का सफर

मुंबई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। ईशान खट्टर और विशाल जेठवां की फिल्म 'होमबाउंड' के बाद मराठी फिल्म 'दशावतार' को ऑस्कर के 98वें संस्करण के लिए आधिकारिक दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है।
 
दिलीप प्रभावलकर: जवानी में निभाए बुजुर्गों के किरदार, तय किया थिएटर से लेकर ऑस्कर तक का सफर

मुंबई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। ईशान खट्टर और विशाल जेठवां की फिल्म 'होमबाउंड' के बाद मराठी फिल्म 'दशावतार' को ऑस्कर के 98वें संस्करण के लिए आधिकारिक दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है।

फिल्म को 12 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया और फिल्म आलोचकों का दिल जीतने में भी कामयाब रही। फिल्म में लीड रोल में दिलीप प्रभावलकर नजर आए, जिन्होंने हमेशा अपने लुक से लेकर एक्टिंग से सबको प्रभावित किया।

संजय दत्त की 'लगे रहे मुन्ना भाई' फिल्म सभी को याद होगी। फिल्म में थोड़े-थोड़े समय पर दिखने वाला महात्मा गांधी का रोल दिलीप प्रभावलकर ने निभाया था, जो अपनी उम्र से कई ज्यादा बुजुर्ग लगे थे। ये पहला मौका नहीं था जब दिलीप ने अपनी उम्र से बड़े रोल किए। इससे पहले उन्होंने मराठी टीवी धारावाहिक 'श्रीयुत गंगाधर टिपारे', चिमणराव सीरियल में गुण्ड्याभाऊ का किरदार और महाभारत पर आधारित नाटक में विदुर का किरदार निभाया था। अभिनेता खुद मानते हैं कि उन्हें हमेशा बुजुर्गों वाले रोल ऑफर हुए लेकिन उन्होंने अपने किरदार को तवज्जों दी, उम्र को नहीं।

मराठी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दिलीप प्रभावलकर ने लगातार 5 दशकों तक थिएटर, टीवी सीरियल और फिल्मों पर राज किया और आज 81 साल की उम्र में 'दशावतार' कर ऑस्कर का सफर पूरा किया है। 'दशावतार' फिल्म में अभिनेता ने भगवान विष्णु के 10 रूपों को पूरी भक्ति और मेहनत के साथ निभाने की कोशिश की है। वे काफी समय से बीमार थे लेकिन फिर भी ठंडी रातें और जंगलों का तापमान भी उनकी हिम्मत को तोड़ नहीं पाया। उन्होंने बुखार में भी पानी में जाकर शूट किया है और दो घंटे तक रोजाना अपने लुक पर मेहनत करते थे।

'दशावतार' भगवान विष्णु के 10 अवतारों पर बनी है, जो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और मजबूत पक्ष को दिखाती है। फिल्म का बजट 5 करोड़ रुपए था, लेकिन फिल्म ने दुनियाभर में 28 करोड़ रुपए की कमाई की। ये फिल्म सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि हमारे महान ग्रंथों का छोटा हिस्सा है, जिसे उन्होंने विदेश की धरती तक पहुंचाया है। फिल्म को ग्लोबल लेवल पर भी पहचान मिली और ये पहली मराठी फिल्म है, जिसे ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया है।

--आईएएनएस

पीएस/डीकेपी