Aapka Rajasthan

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में आईएफएसओ की त्वरित कार्रवाई, बुजुर्ग पीड़ित को समय पर पहुंचाई मदद

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट की ‘प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम’ ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामले में एक वरिष्ठ नागरिक तक समय रहते सहायता पहुंचाई। पुलिस की यह कार्रवाई नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच के दौरान सामने आए मनी ट्रेल के आधार पर की गई।
 

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट की ‘प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम’ ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामले में एक वरिष्ठ नागरिक तक समय रहते सहायता पहुंचाई। पुलिस की यह कार्रवाई नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच के दौरान सामने आए मनी ट्रेल के आधार पर की गई।

पुलिस के अनुसार, 20 सितंबर को हुई इस साइबर धोखाधड़ी में करीब 67.30 लाख रुपए की रकम शामिल थी। मामले की जांच के दौरान आईएफएसओ टीम ने बैंक खातों में हुए लेन-देन का विश्लेषण किया। टीम में इंस्पेक्टर परवीन कुमार, हेड कॉन्स्टेबल मनोज और महिला कॉन्स्टेबल मीनाक्षी शामिल थे।

मनी ट्रेल की जांच में टीम को एक्सिस बैंक में एक लेयर-1 म्यूल अकाउंट का पता चला। यह खाता कर्नाटक के नागौरी स्थित एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर था। इस खाते में रकम आने के स्रोतों की जांच आगे बढ़ाई गई तो साउथ इंडियन बैंक का एक सेविंग्स अकाउंट सामने आया।

पुलिस को शुरुआती तौर पर आशंका हुई कि यह खाता या तो साइबर धोखाधड़ी द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है या फिर किसी ऐसे व्यक्ति का बैंक खाता है, जो खुद साइबर धोखाधड़ी का शिकार होकर अनजाने में ठगों के खाते में रकम भेज रहा है। खाते की जानकारी और सब्सक्राइबर डिटेल के आधार पर पुलिस ने खाताधारक की पहचान की। उसका पता पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में मिला।

इसके बाद आईएफएसओ टीम ने तत्काल खाताधारक से संपर्क किया। पुलिस के मुताबिक, वह व्यक्ति अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक थे और घटना को लेकर बेहद परेशान थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईएफएसओ टीम ने जनकपुरी के एसएचओ से समन्वय किया और बीट कॉन्स्टेबल आरके मीणा को तत्काल उनके घर भेजा गया।

पुलिस ने वरिष्ठ नागरिक के परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया और उन्हें मौके पर बुलाया, ताकि उन्हें तत्काल भावनात्मक और पारिवारिक सहयोग मिल सके। इसके साथ ही पुलिस ने उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में सहायता दी। शिकायत दर्ज होने के बाद रकम को ट्रैक कर होल्ड कराने और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की कार्रवाई की गई।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस के मुताबिक, कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम्स, अदालत या अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी नागरिक को गिरफ्तार या पूछताछ के नाम पर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहती।

पुलिस ने लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, से अपील की है कि ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं, पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत कॉल काटकर परिवार के सदस्यों को सूचित करें। साइबर ठगी की स्थिति में 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। पुलिस के अनुसार, घटना की तत्काल सूचना मिलने से ठगी की रकम को ट्रैक कर उसे रोकने की संभावना बढ़ जाती है।

--आईएएनएस

एसएके/एबीएम