‘दीदी, आप कैसी हैं’, पीएम मोदी-आशा भोसले की पहली मुलाकात की दिलचस्प दास्तान आई सामने
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। मशहूर गायिका आशा भोसले के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, संघर्षों और यात्रा को समर्पित डिजिटल मंच 'मोदी आर्काइव' ने प्रधानमंत्री और आशा भोसले की मुलाकात की कहानी शेयर की है। इसमें दोनों के बीच हुए संवाद, व्यक्तिगत स्मृतियां और विभिन्न सार्वजनिक अवसरों का जिक्र किया गया है।
'मोदी आर्काइव' के सोशल मीडिया पोस्ट में बताया गया है कि कैसे आशा भोसले ने एक बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर संपर्क किया था, जिसमें उन्होंने गुजरात की जड़ों के बारे में बात की और अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं।
पोस्ट में कहा गया है, "आशा भोसले की आवाज ने आजाद भारत के संगीत को एक पहचान दी थी। उन्होंने आठ दशकों में 12,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए थे। फिर भी उन्होंने एक ऐसे मुख्यमंत्री को फोन किया जिनसे वह कभी मिली नहीं थीं और उन्हें बताया कि उनकी मां गुजराती थीं। उन्होंने कहा कि गुजरात का विकास उनका फर्ज और जिम्मेदारी है। जब उन्होंने फोन रख दिया, तो उनके एक दोस्त ने धीरे से कहा कि आशा बेन, हमारे मोदी भाई बहुत अच्छे इंसान हैं।"
पीएम मोदी और आशा भोसले की पहली मुलाकात के बारे में पोस्ट में लिखा है, "उस पहली मुलाकात से वह बहुत प्रभावित हुईं। अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी था। वे (नरेंद्र मोदी और आशा भोसले) 2013 में पुणे में दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन के मौके पर आमने-सामने मिले। यह अस्पताल उनके पिता की याद में बनाया गया था, जिनका सही इलाज नहीं मिलने पर निधन हो चुका था। मंच पर अपनी सीट पर बैठने से पहले, नरेंद्र मोदी उनकी तरफ मुड़े और सीधे-सादे अंदाज में पूछा, 'दीदी, आप कैसी हैं?' वह एक मुख्यमंत्री थे, और उनके आस-पास सरकारी कामकाज की सारी औपचारिकताएं थीं। फिर भी, उन्होंने सबसे पहले उन्हें 'दीदी' कहकर पुकारा। उस दिन उन्होंने (पीएम मोदी) उनसे एक ऐसी बात कही जिसे वह कभी नहीं भूलीं।"
'मोदी आर्काइव' के अनुसार, जब वह जाने लगे, तो उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, 'दीदी, मैं चलता हूं। फिर मिलेंगे।' उस दिन से, वह उन्हें अपना छोटा भाई मानने लगीं। उस दिन उनका दस साल का पोता भी पुणे में मौजूद था। यह जाने बिना कि मुख्यमंत्री के सामने बड़ी-बड़ी भविष्यवाणियां नहीं करनी चाहिए, उसने नरेंद्र मोदी की तरफ देखा और पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, 'जबरदस्त जीत होगी।'
नरेंद्र मोदी ने उसकी बात सुनी और मुस्कुरा दिए। उस मुलाकात के बाद जिंदगी अपनी रफ्तार से चलती रही और दस साल गुजर गए। एक और कार्यक्रम में, उनकी पोती प्रधानमंत्री के पास ही बैठी थी। उसे उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री उसके साथ विनम्र तो होंगे, लेकिन एक निश्चित दूरी बनाए रखेंगे। उसने पूछा, 'क्या आपको मैं याद हूं?' उन्होंने तुरंत जवाब दिया, 'एक बार मैं किसी से मिल लेता हूं, तो उन्हें कभी नहीं भूलता।' फिर उन्होंने उसके भाई के बारे में पूछा।
पोस्ट में कहा गया है, "आशा भोसले ने बताया कि उनकी पोती हैरान रह गई थी। प्रधानमंत्री, जो 1.4 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं, उन्हें एक दस साल का लड़का याद था जिससे वे दस साल पहले, बस एक बार, चलते-फिरते मिले थे। यह एक छोटी सी कहानी लग सकती है, लेकिन अगर आप इस पर सोचें, तो यह असल में एक बहुत बड़ी कहानी है।"
अक्टूबर 2015 में आशा भोसले ने अपने बेटे हेमंत को खो दिया। स्कॉटलैंड में कैंसर के कारण अचानक उनका निधन हो गया। 'मोदी आर्काइव' के अनुसार, उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री को माफी मांगने के लिए एक पत्र लिखा। वह दिल्ली में उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकी थीं। उन्होंने (पीएम मोदी) जवाब में अपनापन और संवेदना दिखाई।
उन्होंने लिखा, "प्रिय आशा भोसले ताई, आपके बेटे के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं आपके साथ हैं।"
2016 में, आशा भोसले अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला गईं। वह प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुरू की गई एक सरकारी पहल के तहत वहां गई थीं, जिसका उद्देश्य देश के सबसे दूरदराज और कठिन जगहों पर तैनात सैनिकों और आम नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना था। उन्होंने वहां एक-एक करके जवानों को राखियां बांधीं। उन्होंने बताया कि जब वह घर लौटीं, तो उनका मन गहरी भावनाओं से भरा हुआ था।
अप्रैल 2022 में प्रधानमंत्री मोदी को मुंबई के षणमुखानंद हॉल में पहला 'लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार' मिला। 'मोदी आर्काइव' के पोस्ट में लिखा है, "वे, जो आम तौर पर कभी भी सम्मान स्वीकार नहीं करते, उन्होंने इस बार एक अपवाद बनाया। उन्होंने यह बात साफ-साफ कही, 'मैं आम तौर पर ऐसे समारोहों से दूर ही रहता हूं, लेकिन जब कोई पुरस्कार लता मंगेशकर जैसी बड़ी बहन के नाम पर हो, तो उसे स्वीकार करना मेरा कर्तव्य बन जाता है, क्योंकि मंगेशकर परिवार का मुझ पर बहुत स्नेह और अधिकार है।' उन्होंने यह पुरस्कार हर भारतीय को समर्पित किया।"
5 अक्टूबर 2024 को एक कार्यक्रम के दौरान आशा भोसले ने मराठी भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। अपनी मातृभाषा में भाषण देते समय वे काफी भावुक हो गईं। 2025 में पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर आशा भोसले ने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया। उन्होंने कहा, "हमारे लिए तो एक घर संभालना भी मुश्किल होता है। पीएम मोदी इतने बड़े देश को संभाल रहे हैं। वे सुबह 4 बजे उठते हैं और योग करते हैं। मुझे उनका अनुशासन बहुत पसंद है। मैंने उनके मुंह से कभी किसी के बारे में कोई बुरी बात नहीं सुनी। मुझे लगता है कि वे बहुत ही दयालु इंसान हैं। जब दूसरे लोग उनके बारे में कड़वी बातें भी कहते हैं, तब भी वे बस मुस्कुरा देते हैं। वे सिर हिलाते हैं। वे कहते हैं, 'हां, जितना चाहो कह लो।' यह बहुत बड़ी बात है।"
आशा भोसले का जन्म 1933 में हुआ था और उन्होंने कई नेताओं को आते-जाते देखा, एक ऐसे नजरिए से, जिसका अनुभव बहुत कम भारतीयों को ही मिल पाता है। आशा भोसले ने अपने बयान में कहा था, "मैंने हमारे सभी प्रधानमंत्रियों को देखा है। आज 90 साल की उम्र में, मैं इस नतीजे पर पहुंची हूं कि पिछले 10 साल में भारत बहुत समृद्ध हुआ है।"
आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ। वे 92 वर्ष की थीं।
--आईएएनएस
डीसीएच/वीसी
