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'वह ऐसे ही कामयाबी हासिल करते रहें': धीरज के पिता ने बेटे के ऐतिहासिक वर्ल्ड कप फाइनल गोल्ड पर जताई खुशी

विजयवाड़ा, 15 सितंबर (आईएएनएस)। धीरज बोम्मादेवरा की ऐतिहासिक तीरंदाजी विश्व कप फाइनल की जीत से उनके पिता श्रवण कुमार बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। पिता अपने बेटे का स्वर्ण पदक भारतीय तीरंदाजी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हैं।
 

विजयवाड़ा, 15 सितंबर (आईएएनएस)। धीरज बोम्मादेवरा की ऐतिहासिक तीरंदाजी विश्व कप फाइनल की जीत से उनके पिता श्रवण कुमार बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। पिता अपने बेटे का स्वर्ण पदक भारतीय तीरंदाजी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हैं।

25 वर्षीय तीरंदाज ने पिछले 12 महीनों में शानदार प्रदर्शन करते हुए साल्टिलो 2026 आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में रिकर्व पुरुष वर्ग का खिताब जीता था। इसके साथ ही वह डोला बनर्जी के बाद इस सर्किट पर भारत के दूसरे चैंपियन बन गए। साथ ही, वह वर्ल्ड कप फाइनल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष आर्चर भी बने।

श्रवण ने 'आईएएनएस' से ​​कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि मेरा बेटा वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाला पहला भारतीय तीरंदाज बन गया है।"

श्रवण ने कहा कि धीरज की यह कामयाबी बरसों की कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके बेटे ने कम उम्र में ही अपना स्पोर्ट्स करियर शुरू किया था।

उन्होंने कहा, "एक माता-पिता के तौर पर मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि एक भारतीय एथलीट, जिसने 2006 में अपना करियर शुरू किया था, उसने 2026 में इतना बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है।"

धीरज साल 2023 और 2024 में मेडल जीते बगैर लौटे थे। यह उनका तीसरा वर्ल्ड कप फाइनल था। मेक्सिको में मिली इस कामयाबी ने उन्हें उनका सबसे बड़ा व्यक्तिगत खिताब दिलाया।

धीरज पिछले कुछ वर्षों से आठवें, नौवें या 10वें स्थान के आसपास थे, अब वर्ल्ड नंबर 4 पर पहुंच गए हैं। श्रवण ने वर्ल्ड रैंकिंग में अपने बेटे की तरक्की का जिक्र करते हुए कहा, "उनकी बायोग्राफी में भी लिखा है, 'मैं वर्ल्ड नंबर वन बनना चाहता हूं।' पिछले तीन-चार वर्षों से वह लगातार वर्ल्ड नंबर 8, 9 या 10 के आसपास रहे हैं। यह मेडल जीतने के बाद, वह अब वर्ल्ड नंबर 4 पर पहुंच गए हैं। वह वर्ल्ड रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचने वाले पहले भारतीय तीरंदाज हैं, जो भारत के लिए एक रिकॉर्ड है। हमें उम्मीद है कि वह भविष्य में और भी कई उपलब्धियां हासिल करेंगे।"

धीरज की यह कामयाबी ऐसे परिवार से आई है, जिसका अनुशासित सेवाओं से गहरा नाता रहा है। उनके पिता भारतीय नौसेना से जुड़े रहे हैं और उनके दादा बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन में कार्यरत थे, जबकि उनके भाई एक शिक्षक हैं।

धीरज की मां रेवती ने भी इस उपलब्धि को परिवार के लिए बेहद खुशी का पल बताया। उन्होंने कहा कि धीरज का वर्ल्ड कप फाइनल गोल्ड मेडल न केवल उनके लिए, बल्कि आंध्र प्रदेश और देश के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

धीरज के पिता खुद लगभग दो दशकों से तीरंदाजी से जुड़े रहे हैं। वह नेशनल टेक्निकल ऑफिशियल के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं और आंध्र प्रदेश में तीरंदाजी प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं।

श्रवण ने कहा कि परिवार को अब उम्मीद है कि धीरज एशियन गेम्स में भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखेंगे। मेक्सिको में मिली सफलता के बाद यह तीरंदाज इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता के लिए रवाना हो चुका है।

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि वह वहां भी कुछ खास हासिल करेंगे। वह पहले ही एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल (टीम सिल्वर मेडल सहित) जीत चुके हैं और उनके नाम कई इंटरनेशनल मेडल हैं।"

परिवार के लिए धीरज का सफर सिर्फ व्यक्तिगत सफलता से कहीं बढ़कर है; श्रवण को उम्मीद है कि उनका बेटा देश का नाम रोशन करता रहेगा।

--आईएएनएस

आरएसजी