धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के अडिग संघर्ष और उनकी जीत का नतीजा: चंद्रशेखर
लखनऊ, 25 जुलाई (आईएएनएस)। सांसद चंद्रशेखर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के अडिग संघर्ष और उनकी जीत का उदाहरण बताया।
सांसद चंद्रशेखर ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमने पहले ही इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो हम हर जनपद में ज्ञापन सौंपेंगे। सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक का घेराव करेंगे। अगर इसके बावजूद सरकार नहीं मानी तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके लिए हमने तैयारी पूरी कर ली थी। हमने 23 जुलाई को स्पष्ट कर दिया था कि हम किसी भी कीमत पर युवाओं के साथ हुए अत्याचार को कमजोर नहीं होने देंगे। आज इसका पहला दिन था। पहले ही दिन के आंदोलन में सरकार ने हमारी मांग मान ली। जिन बच्चों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे, उन्हें लेकर क्या फैसला किया गया। इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। जिन बच्चों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया था, उनके परिजनों को मुआवजा देने के लिए क्या कदम उठाया गया। इस बारे में भी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बिना पुलिस वर्दी में प्रदर्शनकारी छात्रों को मारा पीटा, महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार किए, ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करने जा रहा है। इस बारे में भी मुझे कोई जानकारी नहीं है। हमारी मांगों पर विचार किया गया है। ऐसी स्थिति में हम चाहेंगे कि सोमवार को संसद चले। दूसरे शिक्षा मंत्री आ जाएंगे, लेकिन जब तक नीतियों पर काम नहीं किया जाएगा, तब बच्चों को उसका लाभ नहीं मिलेगा।
सांसद ने कहा कि मेरा कहना है कि परीक्षा का आयोजन दूर क्यों किया जाता है। सरकार को परीक्षा केंद्र पास में ही करना चाहिए, ताकि बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। एक लाख बच्चों ने फॉर्म भरे, लेकिन 100 नौकरियां ही उपलब्धियां हैं तो ऐसी स्थिति में बाकी बच्चों से जो आप फॉर्म के पैसे ले रहो हो, ऐसा क्यों कर रहे हो ? आपको बच्चों के पैसे वापस करने चाहिए। ऐसी स्थिति में सुधार करने की जरूरत है। राष्ट्रीय और राज्य कैलेंडर बनाने की जरूरत है, ताकि बच्चों को यह पता चल सके कि कौन सी परीक्षा कब है? इससे बच्चों को तैयारी करने में मदद मिलेगी।
साथ ही, जब उनसे पूछा गया कि क्या जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर भी किसी प्रकार का आंदोलन होगा तो इस पर उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी मिली है कि सरकार 3 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य खराब करने की कोशिश में जुटी हुई है। जब यूनिवर्सिटी बनी तो वो एरिया रामपुर डेवलेपमेंट के अधीन नहीं आता था। यह सबकुछ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत किया जा रहा है। मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि अगर उत्तर प्रदेश में कोई भी लड़ाई बच्चों के भविष्य के लिए लड़ी जाएगी तो हम लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों को पीटना नहीं चाहिए था। यह सरकार छात्र विरोधी है। अगर छात्रों को सिर पर डंडे नहीं मारने चाहिए थे। मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता। मैं संविधानवादी व्यक्ति हूं।
--आईएएनएस
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