'धर्म मनुष्य को कल्याण और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करता है', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से धर्म के माध्यम से कल्याण और उन्नति का संदेश देते हुए सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सुभाषित साझा किया गया है। संस्कृत श्लोक के माध्यम से पीएम ने क्षमा, विद्या और अहिंसा को लेकर संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, "एको धर्मः परं श्रेयः क्षमैका शान्तिरुत्तमा। विद्यैका परमा तृप्तिरहिंसैका सुखावहा॥" साझा किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि धर्म मनुष्य को कल्याण और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करता है। क्षमा मानसिक शांति का सर्वोत्तम साधन है। विद्या ही वास्तविक संतोष का मूल आधार है और अहिंसा संसार में स्थाई सुख प्रदान करती है। अत: इन गुणों को आत्मसात कर मनुष्य को अपने जीवन को श्रेष्ठ, शांत और आनंदमय बना सकता है।
प्रधानमंत्री की ओर से यह श्लोक महाभारत के अंतर्गत विदुर नीति (उद्यो पर्व, अध्याय 33, श्लोक 48) से साझा किया गया है। यह श्लोक महात्मा विदुर ने हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र को दिए थे। जब धृतराष्ट्र मानसिक अशांति और पुत्र मोह में व्याकुल थे, तब विदुर ने उन्हें नीति, धर्म और जीवन के शाश्वत सत्यों का बोध कराया था।
इस श्लोक में जीवन के चार सबसे बड़े और मूल्यवान सत्यों के बारे में बात की गई है। इस श्लोक में कहा गया है कि धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय या पूजा-पद्धति से नहीं, बल्कि कर्तव्य-परायणता, नैतिकता, और मानवता से है। इंसान चाहे धन कमा ले, यश पा ले, या सत्ता हासिल कर ले, लेकिन अंत में उसका सच्चा मार्गदर्शक और रक्षक उसका धर्म (सत्य और अच्छे कर्म) ही होता है। यही जीवन का सर्वोच्च कल्याणकारी मार्ग है।
श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि क्रोध और बदला लेने की भावना मनुष्य के अंदर की शांति को जला देती है। जब किसी की गलती को माफ कर दिया जाता है तो मन द्वेष और तनाव से मुक्त हो जाता है। क्षमा वीरता का भी आभूषण है और मानसिक शांति पाने का सबसे अचूक साधन है।
इस श्लोक में कहा गया है कि धन की भूख कभी नहीं मिटती; जितना मिलता है, लालसा उतनी ही बढ़ती जाती है। इसके विपरीत, विद्या (ज्ञान) मनुष्य के अज्ञान को दूर करती है, उसे विवेकशील बनाती है और जीवन में ऐसा संबल देती है कि व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुष्ट और आनंदित रहता है।
श्लोक में कहा गया है कि हिंसा, द्वेष और कलह हमेशा भय, असुरक्षा और दुख को जन्म देते हैं। जहां अहिंसा और करुणा का वास होता है, वहां समाज में और खुद के जीवन में भी प्रेम, भाईचारा और सच्चा सुख कायम होता है।
--आईएएनएस
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