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धर्म की रक्षा सत्य और परिवार की रक्षा मनुष्य के सदाचार से होती है, पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया गया है। इसके जरिए धर्म और परिवार की रक्षा का संदेश दिया गया है।
 

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया गया है। इसके जरिए धर्म और परिवार की रक्षा का संदेश दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर संस्कृत श्लोक, "सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याभ्यासेन रक्ष्यते। मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते॥" साझा किया है। इसका हिंदी में अर्थ है कि धर्म की रक्षा सत्य से होती है, विद्या की रक्षा उसके नियमित अभ्यास से। रूप की रक्षा सौम्यता से होती है और परिवार की रक्षा मनुष्य के सदाचार से होती है।

सत्येन रक्ष्यते धर्म अर्थात सत्य बोलने और सत्य का पालन करने से धर्म की रक्षा होती है। विद्याऽभ्यासेन रक्ष्यते अर्थात निरंतर अभ्यास (या अध्ययन) करने से विद्या सुरक्षित और जीवंत रहती है। मृजया रक्ष्यते रूपम् का मतलब है कि स्वच्छता और सजगता से शरीर तथा रूप-सौंदर्य की रक्षा होती है। कुलं वृत्तेन रक्ष्यते का अर्थ है कि अच्छे आचरण, चरित्र और सदाचार से कुल (वंश) की प्रतिष्ठा बनी रहती है।

यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक महाभारत (उद्योग पर्व - 34/39) से लिया गया है। महाभारत के उद्योग पर्व के अंतर्गत अध्याय 39 (प्रजागर पर्व का हिस्सा) महाराजा धृतराष्ट्र और महात्मा विदुर के संवाद से जुड़ा है।

इस अध्याय के प्रारंभ में राजा धृतराष्ट्र मनुष्य की परवशता, कर्म और दैवी (भाग्य) शक्ति पर विचार करते हुए विदुर से मार्गदर्शन और आत्मज्ञान की बातें पूछते हैं। महात्मा विदुर धृतराष्ट्र को धर्म, सदाचार, सज्जन पुरुषों के लक्षण और राजा के कर्तव्यों का गहरा उपदेश देते हैं।

इस अध्याय में यह बताया गया है कि मनुष्य किस तरह मोह, लोभ और अहंकार में फंसकर विनाश के मार्ग पर चला जाता है और सच्चे ज्ञानी तथा नीतिवान व्यक्ति को कैसा आचरण करना चाहिए।

इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, "प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते। आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्॥" साझा किया गया था, जिसका हिंदी भावार्थ है कि आत्मज्ञान से मनुष्य को आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलते हैं, जो उसे मानसिक तनाव से मुक्त करते हैं। अपने अनुभव से अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना ही सच्चा ज्ञान है और यही ज्ञान मनुष्य को परम शांति तथा अमरत्व की ओर ले जाता है।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी