धर्म का मूल संदेश इंसानियत और प्रेम है, टकराव नहीं: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
बरेली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने धर्म को डीएनए से जुड़ा हुआ बताया था। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि धार्मिक आस्था रखना सकारात्मक बात है, लेकिन कट्टरपंथ को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने युवाओं से इंसानियत, आपसी सहयोग और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना रखने की अपील की।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मोहन भागवत ने धर्म को लेकर जो बात कही है, वह महत्वपूर्ण है। भारत में रहने वाले लोगों के जीवन में धर्म और धार्मिक मूल्य किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। धर्म का पालन करना अच्छी बात है, लेकिन किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरता उचित नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने के साथ-साथ इंसानियत को भी अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। अगर व्यक्ति के दिल और दिमाग में मानवता की भावना है तो वह बेहतर इंसान बन सकता है। उनके मुताबिक धर्म का मूल संदेश इंसानियत, आपसी प्रेम और एक-दूसरे के सम्मान से जुड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों के बीच एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सद्भाव की भावना होनी चाहिए। यदि व्यक्ति अपने धर्म के प्रति आस्था रखने के साथ दूसरे धर्मों का भी सम्मान करेगा तो समाज में टकराव की परिस्थितियां कम होंगी। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना सामाजिक सौहार्द के लिए महत्वपूर्ण है। धार्मिक पहचान अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत सभी को जोड़ने वाली समान भावना है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने खासतौर पर युवाओं से आपसी सहयोग और एक-दूसरे का साथ देने की भावना विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा यदि समाज में सहयोग और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे तो इसका लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि पूरे देश को मिलेगा। युवाओं में सकारात्मक सोच, परस्पर सहयोग और मानवता की भावना होगी तो वे अपने व्यक्तिगत जीवन में भी सफलता हासिल कर सकते हैं और देश का नाम भी रोशन कर सकते हैं।
मौलाना ने कहा कि उनके विचार में धर्म का उद्देश्य लोगों के बीच दूरी या टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि इंसानियत, प्रेम और सम्मान की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने धार्मिक विश्वासों का पालन करे, लेकिन इसके साथ दूसरों के विश्वास और सम्मान का भी ख्याल रखे। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि समाज में सहयोग, आपसी सम्मान और मानवता की भावना को मजबूत करने की जरूरत है। यदि नई पीढ़ी इन मूल्यों को अपनाती है तो भारत में सामाजिक सद्भाव मजबूत होगा और युवा स्वयं भी आगे बढ़ेंगे।
बरेलवी ने आगे कहा कि धार्मिक आस्था और मानवता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनके मुताबिक, अपने धर्म पर कायम रहते हुए दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान रखना ही सामाजिक शांति और भाईचारे का आधार बन सकता है।
--आईएएनएस
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