देवभूमि का वह इकलौता पंचकेदार, जहां साल के 12 महीने होते हैं महादेव की जटाओं के दर्शन
उत्तराखंड, 25 मई (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर स्थित 'श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर' सनातन आस्था का एक ऐसा जाग्रत केंद्र है, जहां प्रकृति और परमात्मा एकाकार हो जाते हैं। पंचकेदारों में पंचम स्थान पर प्रतिष्ठित इस आदि तीर्थ में देवाधिदेव महादेव की जटाओं (केशों) की पूजा की जाती है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इसके धार्मिक और प्राकृतिक महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक भव्य वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "चमोली जिले की पवित्र धरती पर स्थित श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर पंच केदारों में से एक है। यह भगवान शिव को समर्पित बेहद पवित्र धाम माना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह स्थान श्रद्धालुओं को गहरी शांति और सुकून का अनुभव कराता है। अगर आप चमोली जिले की यात्रा पर जाएं, तो इस पावन मंदिर में दर्शन करना जरूर न भूलें।"
चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित 'पंच केदार' तीर्थों में पांचवां और अंतिम धाम माना जाता है। पंच केदार के इस एकमात्र मंदिर में भगवान शिव की जटाओं (केशों) की पूजा होती है। मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है और इसके कपाट पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान शिव से क्षमा प्राप्त करने के लिए यहां तपस्या की थी। इसके अलावा, महर्षि दुर्वासा ने भी इसी स्थान पर कल्पवृक्ष के नीचे कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण इस स्थान का नाम 'कल्पेश्वर' पड़ा।
मंदिर के समीप कल्पगंगा नदी, जिसे हिरणावती भी कहा जाता है, बहती है। पूरा क्षेत्र हरे-भरे जंगलों और सेब के बगीचों से घिरा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए ऋषिकेश से हेलंग (चमोली) तक सड़क मार्ग उपलब्ध है। हेलंग से उर्गम घाटी (लगभग 30 किलोमीटर) तक वाहन मिलते हैं। इसके बाद मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 2 से 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
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