देशभर के स्कूलों में नशे के खिलाफ अभियान, नशा मुक्त विद्यालय बनाने की पहल
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। देश में बच्चों और किशोरों को नशे की लत से बचाने तथा उन्हें स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एक अभियान चला रहा है। यह नशा मुक्त विद्यालय अभियान एक देशव्यापी पहल है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जेन-जी अगेंस्ट एडिक्शन, नशा मुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की है। अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से की। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया है।
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विद्यालयों को निर्देश दिया था कि वे विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्त भारत’ की शपथ भी ली।
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी लड़ाई स्कूल स्तर से ही शुरू होती है। यदि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था में ही तंबाकू, शराब और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए, तो उन्हें नशे की गिरफ्त में आने से रोका जा सकता है। इसी सोच के साथ ‘नशा मुक्त विद्यालय’ कार्ययोजना को देशभर के स्कूलों में लागू किया जा रहा है। इस कार्ययोजना के तहत विद्यालयों में तंबाकू और मादक पदार्थों के सेवन के दुष्परिणामों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पोस्टर, निबंध, भाषण, वाद-विवाद, चित्रकला प्रतियोगिताएं, शपथ ग्रहण, रैलियां और परामर्श सत्र जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों को तंबाकू और मादक पदार्थों से पूर्णत मुक्त शैक्षणिक संस्थान बनाने पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षाविदों के मुताबिक इस अभियान में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं। वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानकर समय रहते उन्हें सही दिशा दे सकते हैं तथा नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर सकते हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के हमारे प्रोफेसर्स से भी करना चाहता हूं। आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े परिणाम ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है कि घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए ताकि, ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सकें। वहीं, अभिभावकों की भागीदारी भी अभियान की सफलता है।
शिक्षाविदों के अनुसार, माता-पिता को बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए, उनके मित्रों और दैनिक गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखनी चाहिए तथा ऐसा पारिवारिक वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां बच्चे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें। परिवार और विद्यालय के संयुक्त प्रयास से ही बच्चों को नशे की ओर बढ़ने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकल्प है। स्कूल, शिक्षक, अभिभावक और समाज यदि मिलकर बच्चों का मार्गदर्शन करें, तो आने वाली पीढ़ी को नशे से सुरक्षित रखा जा सकता है। मंत्रालय ने सभी विद्यालयों से अपील की है कि वे ‘नशा मुक्त विद्यालय’ अभियान को नियमित गतिविधि बनाएं और विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली, खेलकूद, योग, अनुशासन और सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देकर नशा मुक्त भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
--आईएएनएस
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