देश की आजादी में सबके योगदान को नकारा नहीं जा सकता: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के 'वंदे मातरम' से जुड़े प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी उस विचारधारा और नीति पर कायम रहेगी, जिसके तहत देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी। स्वतंत्रता आंदोलन में सभी वर्गों और नेताओं के योगदान को न तो भुलाया जा सकता है और न ही उसे झुठलाया जा सकता है।
इमरान मसूद ने अमित शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया जा रहा है, वे कई मामलों में भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोगों के खिलाफ भी जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 1941 तक कई जगहों पर हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक सहयोग के उदाहरण मौजूद थे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि वे एके फजलुल हक की सरकार में वित्त मंत्री रहे थे। उन्होंने सिंध प्रांत की तत्कालीन राजनीति और मुस्लिम लीग से जुड़े घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि उस दौर में एक तरफ कुछ लोग अंग्रेजों के साथ राजनीतिक समीकरण बना रहे थे, जबकि कांग्रेस अंग्रेजी शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन चला रही थी।
'वंदे मातरम' को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में इसका गायन लंबे समय से होता रहा है। 1937 में इसे लेकर चर्चा हुई थी और इसे शामिल करने के निर्णय में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह का भी महत्व था। उस वक्त के कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस ने रवींद्रनाथ टैगोर से बाकायदा पत्र लिखकर सलाह ली थी। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल सहित स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य प्रमुख नेताओं का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि क्या इन सभी महान नेताओं के योगदान को देशभक्ति के पैमाने पर कमतर आंका जा सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि देशभक्ति की पूरी जिम्मेदारी किसी एक संगठन या विचारधारा के पास कैसे हो सकती है। स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक है और उसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों के लोगों ने योगदान दिया है।
महाराष्ट्र में गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की खबरों पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए। भाषा लोगों को प्रेम और समझाइश के जरिए सीखने के लिए प्रेरित की जानी चाहिए, कार्रवाई के जरिए नहीं। अगर किसी व्यक्ति से कोई भाषा सीखने की अपेक्षा है, तो उसे समझाया जाना चाहिए और इसके लिए सकारात्मक माहौल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाषा का सम्मान और उसे सीखने की भावना प्रेम से विकसित की जा सकती है, किसी तरह की जबरदस्ती से नहीं।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर इमरान मसूद ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कांग्रेस ने महान नेता के कार्यों और देश के लिए उनके योगदान को स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए और उनकी भूमिका को याद किया जाना चाहिए।
इमरान मसूद ने शिक्षा संस्थानों को लेकर आरएसएस से जुड़े लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े लोगों ने देश के शिक्षा संस्थानों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने मौजूदा समय में सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों का जिक्र करते हुए इसके लिए भी आरएसएस से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया।
--आईएएनएस
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