दिल्ली शब्दोत्सव 2026: हम न बटेंगे और न ही कटेंगे : माधवी लता
नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली में आयोजित शब्दोत्सव 2026 के दूसरे दिन के सत्र में हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकीं माधवी लता शामिल हुईं। उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
शब्दोत्सव में शामिल माधवी लता ने दक्षिण में मोदी फैक्टर पर कहा कि उत्तर की ओर जाने का मतलब शक्तिवान बनना है। आपके अंदर ऊर्जा बढ़ती है। वहीं, दक्षिण की ओर जाने का मतलब है किसी शक्ति को समन्वित करना, यानी सभ्यता के अंतर्गत यात्रा करना। जो आपने एक व्यक्ति के रूप में सीखा है, उस पर चलना दक्षिण पथ है। यह कोई नक्शा नहीं है कि आप दक्षिण की ओर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वेद की भाषा सनातन है। अंग्रेज हों या मुगल, तब उनका जन्म भी नहीं हुआ था। तब से हम इस पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षिण पथ का मतलब एक व्यक्ति का आगे बढ़ना है और उत्तर पथ पर व्यक्ति का शक्तिवान होना। यह प्रधानमंत्री मोदी भी कर रहे हैं। वह ‘सबका साथ, सबका विकास’ के जरिए यही कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिन्दू एक मजहब नहीं है। हिन्दू एक धर्म है, ऐसा धर्म जो भारतवासियों से ‘जय भारत’ कहलवाता है, ‘जय फिलिस्तीन’ नहीं। यह एक ऐसा धर्म है कि प्रधानमंत्री विश्व में वैक्सीन बांट सकते हैं। यही हिन्दू सनातन धर्म है।
हैदराबाद में चुनाव के वक्त ‘तीर’ चलाने के इशारे कर माधवी लता विवादों में आ गई थीं। इस पर उन्होंने कहा कि हमने उज्ज्वल भारत की ओर ले जाने वाला रामचंद्र का तीर रामनवमी के दिन आकाश में भेजा है, लेकिन जिनमें सनातन शक्ति नहीं है, भारत को आगे ले जाने की सोच नहीं है, जिनके खून में सबको साथ लेकर चलने की भावना नहीं है, कुछ लोग इतने छोटे हो गए हैं कि उस तीर को त्योहार के दिन अपने स्वार्थ में बदल लिया है।
उन्होंने कहा कि हम ऐसे धर्म से आते हैं जो अहिंसा सिखाता है। अगले ही दिन जब मुझे लगा कि किसी को उकसाने और भड़काने से किसी का दिल दुखता है तो मैंने कहा कि हमारे धर्म ने यह नहीं सिखाया कि हमें अपना तीर मस्जिद पर चलाना है।
उन्होंने मोदी फैक्टर को लेकर कहा कि मैं किसी राजनीतिक परिवार से नहीं हूं। मुझे राजनीति नहीं आती है। मैं सिर्फ अपने भाई पीएम मोदी के लिए घर से बाहर निकली हूं। दक्षिण में हमें बाहर निकलना है, पीएम का साथ देना है और उनका हाथ बंटाना है, ताकि भारत ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे के साथ आगे की ओर चल सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता में आना था, लेकिन कांग्रेस कैसे जीत गई? मैंने किसी से टिकट नहीं मांगा। टिकट खुद मेरे पास, मेरे घर आया। इससे पता चलता है कि भाजपा कितनी स्वच्छ राजनीति करती है। मैंने पार्टी की सदस्यता नहीं ली थी, फिर भी मुझे टिकट मिल गया। माधवी लता ने कहा कि मुझे तीन लाख तीस हजार वोट मिले। इतने वोटरों ने मुझे प्यार से वोट दिया। मैंने किसी को एक रुपया नहीं दिया। भाजपा नोट और वोट की राजनीति नहीं करती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा समन्वय के साथ काम करती है, लोगों के अंदर प्यार और भरोसा जागृत करके सत्ता में आती है। उन्होंने कहा कि आज लिख लीजिए, 2029 में तेलंगाना में भाजपा सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुझे टिकट मिले या न मिले, लेकिन हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी का रफूचक्कर होना तय है। उन्हें हैदराबाद से हम भगा कर रहेंगे।
माधवी लता ने टी. राजा को लेकर यह भी कहा कि घर में लड़ाई होती है, परिवार में भी लड़ाई होती है। वह किसी नाराजगी की वजह से पार्टी से गए हैं। एक न एक दिन वह वापस आ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत ने मुगलों के प्रभाव को रोका और दक्षिण ने सनातन को संरक्षित किया। यह एकता का प्रतीक नहीं तो क्या है? उन्होंने कहा कि आजादी से पहले हम अंग्रेजों की चाल में फंस गए। हमारी सबसे बड़ी नारी शक्ति को आगे बढ़ाने से सनातन धर्म में कभी रोका नहीं गया। अंग्रेजों और मुगलों ने नारी शक्ति को ही सबसे पहले कुचलने का प्रयास किया। जब यह हुआ, तो देश बंटने लगा। यही कांग्रेस भी कर रही है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण से कांग्रेस को उनका हिस्सा (सांसद) मिल रहा था। उन्होंने दक्षिण और उत्तर को जोड़कर रखना अपना धर्म नहीं समझा। जब भाजपा आई, तो उन्हें डर लगने लगा कि कहीं भारत एक न हो जाए। अगर किसी को लगता है कि भारत बंटा हुआ है, तो कोई जवाब दे दे कि पूरे भारत से राम मंदिर के लिए ईंटें क्यों पहुंचाई गईं। हम न बटेंगे और न ही कटेंगे। हम एक हैं और एक ही रहेंगे।
--आईएएनएस
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