दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: आईएफसी पर बड़ी राहत, अब सिर्फ 25 प्रतिशत भुगतान पर एनओसी
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएमएस)। दिल्ली के आम उपभोक्ताओं और डेवलपिंग एजेंसियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (आईएफसी) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक नीति सुधार को मंजूरी दी है। लंबे समय से आईएफसी की उच्च दरें दिल्ली में निर्माण और पुनर्विकास के लिए बड़ी बाधा बनी हुई थीं।
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में डीजेपी ने एक अंतरिम लेकिन प्रभावी समाधान लागू किया है, जिससे उन लाखों लोगों को तुरंत राहत मिलेगी जिनके प्रोजेक्ट्स ऊंचे आईएफसी के कारण रुके हुए थे।
मुख्य निर्णयों की बात करें तो अब उपभोक्ता और डेवलपर्स बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के समय कुल आईएफसी का केवल 25 प्रतिशत भुगतान करके प्रोविजनल एनओसी प्राप्त कर सकेंगे। शेष राशि को बाद में, पानी के कनेक्शन के अंतिम स्वीकृति के समय लागू दरों के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में आईएफसी की गणना प्रणाली में बदलाव—ऑक्यूपेंसी आधारित मॉडल से फ्लोर एरिया आधारित मॉडल में—काफी बढ़ोतरी हुई। कई मामलों में शुल्क 5 से 10 गुना तक बढ़ गया, जिससे आम नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा और निर्माण व पुनर्विकास गतिविधियां ठप हो गईं।
इस वजह से कई संपत्ति मालिक एनओसी प्राप्त नहीं कर पा रहे थे, जिससे बिल्डिंग अप्रूवल और प्रोजेक्ट्स में लगातार देरी हो रही थी।
इस फैसले पर बोलते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, "हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऊंचा आईएफसी लोगों को अपना घर बनाने से रोक रहा है। यह न तो नागरिकों के लिए उचित था और न ही सिस्टम के लिए प्रभावी। हमने इसे एक व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण से ठीक करने का फैसला किया।”
उन्होंने आगे कहा: “हम सिस्टम को लोगों के अनुकूल बना रहे हैं, न कि लोगों को सिस्टम के अनुसार संघर्ष करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अब सिर्फ 25 प्रतिशत भुगतान के साथ निर्माण शुरू किया जा सकता है, और बाकी राशि का निष्पक्ष समायोजन बाद में किया जाएगा।”
उन्होंने व्यापक दृष्टि को रेखांकित करते हुए कहा, "यह सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के विजन के अनुरूप है। हमारा उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, बाधाओं को हटाना और नागरिकों व डेवलपर्स को बिना देरी आगे बढ़ने के लिए सशक्त करना है। दिल्ली को एक कुशल और नागरिक-अनुकूल प्रशासन का मॉडल बनाना है।”
इसके मुख्य लाभ- रुके हुए प्रोजेक्ट्स को तुरंत मंजूरी, तेज अप्रूवल और निर्माण कार्य में तेजी, शुरुआती वित्तीय बोझ में बड़ी कमी और सिस्टम में पारदर्शिता और लचीलापन है।
इसके अलावा, अतिरिक्त राहत के रूप में 200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां आईएफसी से मुक्त रहेंगी, जबकि बड़े प्लॉट्स को भी संशोधित और तर्कसंगत ढांचे का लाभ मिलेगा। अनुमान है कि कई मामलों में कुल आईएफसी देनदारी 50 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जिससे नागरिकों पर लागत का बोझ काफी घटेगा।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, "हमारा उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि एक न्यायसंगत और संतुलित व्यवस्था बनाना है। जब लोग आसानी से भुगतान कर पाएंगे, तभी सिस्टम मजबूत होगा। हम दिल्ली में घर बनाना सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
--आईएएनएस
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