दिल्ली प्रदर्शन पर जगद्गुरु परमहंस आचार्य का राष्ट्रपति को पत्र, हिंसक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की मांग
अयोध्या, 22 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर कई मांगें उठाई हैं। उन्होंने कहा कि देश में होने वाले अनशन, प्रदर्शन, भूख हड़ताल, पदयात्रा और मार्च के लिए अनुमति लेना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को संवैधानिक दायरे में आवश्यक अधिकार दिए जाने की मांग की।
परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में आग्रह किया है कि बिना अनुमति किए जाने वाले प्रदर्शन, यदि हिंसक या अराजक हो जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह सब संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को विपक्षी दलों से जुड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि यह आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़, पत्रकारों के साथ मारपीट और प्रशासन के साथ टकराव जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इस तरह की गतिविधियां देशहित के खिलाफ हैं और इन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज हाथ में होने के बावजूद यदि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है या कानून-व्यवस्था भंग होती है, तो ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आंदोलन के दौरान हिंसक घटनाएं हुई हैं और पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता है और संवैधानिक संस्थाओं का घेराव करता है, तो प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली का मौजूदा प्रदर्शन अब छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने एजेंडे के साथ इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जिससे इसका स्वरूप बदल गया है। आचार्य ने अपने पत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि देश के स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाए। मुगल और आक्रांताओं से जुड़े अध्यायों के स्थान पर गीता, रामायण और देशभक्त महापुरुषों से संबंधित विषयों को अधिक महत्व दिया जाए, ताकि छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन यदि कोई आंदोलन हिंसक रूप लेता है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या कानून-व्यवस्था को चुनौती देता है, तो उसे केवल आंदोलन नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था का गंभीर मामला मानते हुए प्रशासन को संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। परमहंस आचार्य ने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति उनके पत्र पर विचार करेंगी और भविष्य में ऐसे नियम बनाए जाएंगे, जिनसे बिना अनुमति होने वाले हिंसक प्रदर्शन रोके जा सकें तथा राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
--आईएएनएस
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