दिल्ली के बेला एस्टेट में अधिकांश नाम हटने के दावों पर चुनाव आयोग बोला, कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बेला एस्टेट में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं होने के मामले में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने स्थिति स्पष्ट की है। 10 सितंबर को जारी प्रेस नोट में कहा गया कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यह स्पष्टीकरण उन मीडिया रिपोर्टों के बाद जारी किया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि जेजे बेला एस्टेट, विजय घाट के 729 मतदाताओं में से एक को छोड़कर बाकी सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने मतदाताओं के रजिस्टर्ड पते पर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे और बाद में उन्हें एकत्र किया।
बेला एस्टेट से संबंधित पुराने पोलिंग स्टेशन नंबर 33 की मतदाता सूची की जांच में सामने आया कि ज्यादातर मतदाताओं के पते के स्थान पर "एग्रीकल्चर" दर्ज था, जबकि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में ही मकान नंबर दर्ज थे।
प्रेस नोट के मुताबिक, यह इलाका यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यहां रहने वाले बड़ी संख्या में मतदाता यमुना किनारे और आसपास के क्षेत्र में कृषि गतिविधियों से जुड़े हुए थे।
चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस इलाके में कृषि गतिविधियां और खेती 2021 में बंद हो गई थी। इसके बाद 2022-23 में यहां मौजूद रिहायशी ढांचों को भी गिरा दिया गया था। इस कारण पुरानी मतदाता सूची तैयार किए जाने के बाद से इलाके की भौतिक और आवासीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
एसआईआर के दिशा-निर्देशों के तहत बीएलओ को मतदाताओं के रजिस्टर्ड पते पर घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म देना था, हालांकि रिहायशी ढांचे गिराए जाने के कारण संबंधित मतदाता मतदाता सूची में दर्ज पते पर नहीं रह रहे थे।
निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, इससे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 20 (7) और चुनावी पंजीकरण से जुड़े निर्देशों के तहत उनकी "सामान्य निवासी" की स्थिति बदल गई। इसी आधार पर बीएलओ ने इन मतदाताओं को एएसडीडी सूची में रखा।
हालांकि प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई पात्र मतदाता अपना नाम अब मतदाता सूची में नहीं जुड़वा सकता।
चुनाव आयोग के प्रावधानों के मुताबिक, अगर किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में नहीं है और वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 तथा अन्य संबंधित नियमों के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण की पात्रता पूरी करता है, तो वह जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 जमा कर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
प्रेस नोट में बताया गया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र मतदाताओं के दावों पर विचार किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, नए मतदाता के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6, प्रवासी भारतीय मतदाता के लिए फॉर्म-6ए, किसी प्रस्तावित नाम पर आपत्ति या मौजूदा नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 और पता बदलने, विवरण में सुधार, बिना सुधार के नया ईपीआईसी लेने या दिव्यांग मतदाता के रूप में चिन्हित कराने के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन फॉर्म को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) या निर्धारित मतदान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से जमा किया जा सकता है। मतदाता ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।
निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग पारदर्शी, भागीदारीपूर्ण और समावेशी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो।
--आईएएनएस
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