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दिल्ली जल बोर्ड का बड़ा फैसला, सीवर-जलापूर्ति और यमुना सफाई से जुड़ी हजारों करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी की सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था में बड़े सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बोर्ड ने सीवर रखरखाव व्यवस्था में बदलाव के लिए 10 साल की 17,969.93 करोड़ रुपए की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत दिल्ली में 'वन जोन, वन ऑपरेटर' व्यवस्था लागू की जाएगी।
 

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी की सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था में बड़े सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बोर्ड ने सीवर रखरखाव व्यवस्था में बदलाव के लिए 10 साल की 17,969.93 करोड़ रुपए की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत दिल्ली में 'वन जोन, वन ऑपरेटर' व्यवस्था लागू की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत दिल्ली को आठ जोन में बांटा जाएगा। हर जोन के पूरे सीवर नेटवर्क की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर के पास होगी। इसमें सीवर लाइन, मैनहोल, पंपिंग स्टेशन और शिकायतों के समाधान की जिम्मेदारी भी शामिल होगी।

नई व्यवस्था में शिकायत मिलने के बाद मरम्मत करने के बजाय पहले से योजनाबद्ध और नियमित रखरखाव पर जोर दिया जाएगा। जियो-टैग्ड निरीक्षण और केंद्रीय कमांड सेंटर के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। साथ ही सीवर की सफाई पूरी तरह मैकेनिकल और रोबोटिक तरीके से करने की व्यवस्था की जाएगी।

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि इस सुधार का मुख्य उद्देश्य जवाबदेही तय करना है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के लिए यह मायने नहीं रखना चाहिए कि किसी सीवर की जिम्मेदारी किस अधिकारी, डिवीजन या ठेकेदार की है। समस्या होने पर सिस्टम को उसकी जानकारी होनी चाहिए और उसे ठीक करने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

दिल्ली जल बोर्ड वर्तमान में 68 विधानसभा क्षेत्रों में 11,212 किलोमीटर सीवर लाइन, 6.68 लाख मैनहोल और 145 पंपिंग स्टेशनों का रखरखाव करता है। नई व्यवस्था में ऑपरेटर को किया जाने वाला भुगतान उसके प्रदर्शन से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायतों का तेजी से समाधान और सीवर ओवरफ्लो की घटनाओं को कम करना है।

बोर्ड ने दक्षिण दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए 6,044.05 करोड़ रुपए की परियोजना को भी मंजूरी दी है।

यह परियोजना 247 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू होगी और इसके दायरे में 13 यूजीआर कमांड एरिया, 12 विधानसभा क्षेत्र और 2,44,381 घरेलू उपभोक्ता आएंगे।

पानी की रियल टाइम निगरानी और सटीक मीटरिंग के लिए स्मार्ट मीटर और बल्क फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा क्लोरीन और प्रेशर सेंसर लगाए जाने की भी योजना है।

परियोजना का लक्ष्य लगातार और भरोसेमंद जलापूर्ति सुनिश्चित करने के साथ प्रदूषण को खत्म करना और नॉन-रेवेन्यू वाटर को 15 प्रतिशत से नीचे लाना है।

चंद्रावल और वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कमांड एरिया को छोड़कर दिल्ली के बाकी हिस्सों को दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्व समेत छह जोन में बांटा गया है।

पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम जोन के लिए प्रशासनिक मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। इन दोनों जोन की जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार और 15 साल के संचालन एवं रखरखाव पर 11,427 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

यमुना की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने 328 एमजीडी की कुल क्षमता वाले 13 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए टेंडर आमंत्रित करने को मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 7,373 करोड़ रुपए है और इन्हें एनएमसीजी की फंडिंग के तहत पूरा किया जाएगा।

नरेला के नयाबांस में 5.5 एमजीडी क्षमता वाला विकेंद्रीकृत एसटीपी बनाने की 123.23 करोड़ रुपए की परियोजना पहले ही आवंटित की जा चुकी है।

जल मंत्री ने कहा कि बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज को नालों में पहुंचने से रोकना जरूरी है और इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम है।

लंबे समय से लंबित वजीराबाद जलापूर्ति परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया है। बोर्ड ने इसके लिए 1,214.58 करोड़ रुपए के पैकेज को प्रशासनिक मंजूरी दी है।

इसमें 80 एमजीडी क्षमता वाले नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, ऑटोमेटेड रॉ-वॉटर इंटेक और 15 वर्षों का ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस शामिल है। मौजूदा 40 एमजीडी प्लांट का भी पुनर्वास किया जाएगा।

एक अन्य 60 एमजीडी प्लांट, ट्रांसमिशन अपग्रेड, एससीएडीए सिस्टम और वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए 3,505 करोड़ रुपए के एडीबी टॉप-अप लोन को भी मंजूरी दी गई है।

दिल्ली जल बोर्ड ने दिल्ली जल एवं सीवर (टैरिफ एवं मीटरिंग) विनियम, 2026 को भी मंजूरी दे दी है। यह 2012 के नियमों की जगह लेगा।

नई व्यवस्था में पानी और सीवर कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने, शुल्क को तर्कसंगत करने, बिलिंग के नियमों को ज्यादा स्पष्ट बनाने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है।

वर्षा जल संचयन और इस्तेमाल किए गए पानी की रीसाइक्लिंग करने वाले परिवारों को रिबेट देने का भी प्रस्ताव है।

इसके अलावा दिल्ली में 25 वाटर इमरजेंसी सेंटरों के पुनर्निर्माण के लिए 65.49 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इन केंद्रों को आधुनिक, सुरक्षित और डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

बोर्ड ने व्यक्तिगत जल कनेक्शन से जुड़े नियमों में भी बदलाव का फैसला किया है। जहां तकनीकी रूप से संभव होगा और सभी निर्धारित शर्तें पूरी होती होंगी, वहां भवन की ऊंचाई की परवाह किए बिना आवासीय या गैर-घरेलू इकाई को व्यक्तिगत जल कनेक्शन दिया जा सकेगा।

इसके लिए उपभोक्ताओं को 17.5 मीटर की ऊंचाई से नीचे या निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था करनी होगी।

बोर्ड ने वर्षा जल संचयन नीति, 2026 को लागू करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। इसके तहत भूजल रिचार्ज को बाढ़ प्रबंधन से जोड़ने और सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन के नियमों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने की योजना है।

जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली को ऐसी जल व्यवस्था की जरूरत है, जो सामान्य परिस्थितियों के साथ भारी बारिश, सीवर ओवरफ्लो, टैंकर की आपात स्थिति या किसी तकनीकी खराबी के समय भी प्रभावी ढंग से काम कर सके।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी