कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के निकट किया प्रदर्शन, छात्रों के अधिकार और शिक्षा मुद्दों पर चर्चा की मांग
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के निकट विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने हिस्सा लिया और छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हुए। पार्टी ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज से जुड़ा बताते हुए सरकार की कार्रवाई की आलोचना की।
सांसद रंजीत रंजन ने आईएएनएस से बात करते हुए दावा किया, "बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए हैं और कई अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ छात्रों के हाथ-पैर तक टूट गए हैं। ऐसी स्थिति सरकार की नीतियों का परिणाम है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, "पार्टी छात्रों पर हुए कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और घायल छात्रों और उनके परिवारों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है। छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।"
राज्यसभा सदस्य प्रवीण चक्रवर्ती ने इस पूरे घटनाक्रम को संसद में चर्चा का विषय बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, "देश के युवाओं का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और यदि बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं, तो संसद में इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं का समाधान है।"
इधर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों ने भी चिंता जताई। सांसद सुलता देव ने कहा, "मैंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान महिलाओं और छात्राओं पर बल प्रयोग दिखाई देता है। प्रदर्शनकारियों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए।"
बीजद सांसद संतृप्त मिश्रा ने भी कहा, "मेरी पार्टी दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से दुखी है। यदि छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और उचित संवाद स्थापित करना चाहिए।"
आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। पार्टी नेता गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि सरकार को टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। उन्होंने मांग की कि छात्रों की शिकायतों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा, "नई पीढ़ी अपनी अपेक्षाओं और भविष्य को लेकर चिंतित है और अपनी बात सामने रखने का प्रयास कर रही है। युवाओं की भावनाओं और चिंताओं को समझना हर सरकार की जिम्मेदारी है। विपक्ष लगातार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दल छात्रों के अधिकारों, लोकतांत्रिक विरोध और शिक्षा से जुड़े सवालों को लेकर अपनी-अपनी राय सामने रख रहे हैं।"
--आईएएनएस
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