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'फ्लॉप शो' के सुपरहिट किरदार : जसपाल भट्टी ने गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में किया पेश

मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। 80 और 90 के दशक के टीवी दर्शकों के लिए जसपाल भट्टी का नाम कभी नहीं भुलाया जा सकता है। इस कमीडियन ने टीवी पर अपने अनोखे शो के जरिए दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनकी खासियत थी कि वह दर्शकों के सामने गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में पेश किया करते थे।
 
'फ्लॉप शो' के सुपरहिट किरदार : जसपाल भट्टी ने गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में किया पेश

मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। 80 और 90 के दशक के टीवी दर्शकों के लिए जसपाल भट्टी का नाम कभी नहीं भुलाया जा सकता है। इस कमीडियन ने टीवी पर अपने अनोखे शो के जरिए दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनकी खासियत थी कि वह दर्शकों के सामने गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में पेश किया करते थे।

3 मार्च 1955 को अमृतसर में जन्मे जसपाल भट्टी ने गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को इतने हल्के-फुल्के और मजेदार अंदाज में पेश किया कि लोग हंसते-हंसते सोचने पर मजबूर हो जाते थे। उन्हें दूरदर्शन के 'फ्लॉप शो' और 'उल्टा पुल्टा' जैसे शो के लिए याद किया जाता है, जो आज भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला देते हैं।

जसपाल भट्टी की पढ़ाई इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की थी, लेकिन उनका असली जुनून लोगों को हंसाना था। शुरुआत नुक्कड़ नाटकों से हुई और फिर वह दूरदर्शन तक पहुंच गए। जसपाल ने चंडीगढ़ के एक अखबार में कार्टूनिस्ट के तौर पर भी काम किया। कार्टून बनाने का अनुभव उन्हें आम आदमी की समस्याओं और सिस्टम की खामियों को गहराई से समझने में मददगार साबित हुआ। इसी हुनर ने उन्हें टीवी पर कॉमेडी का बादशाह बना दिया।

जसपाल ने पत्नी सविता भट्टी के साथ मिलकर शो बनाए, जिसमें कोई भारी-भरकम सेट नहीं होते थे, न ही डबल मीनिंग या अश्लीलता भरी बातें। सब कुछ साफ-सुथरा, सीधा और बेहद प्रभावी होता था। 'फ्लॉप शो' 90 के दशक में जबरदस्त हिट रहा। इस शो में सरकारी दफ्तरों, नौकरशाही, भ्रष्टाचार और आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों को इतने मजेदार तरीके से दिखाया जाता था कि दर्शक हंसते-हंसते अपनी ही जिंदगी की सच्चाई देख लेते थे।

'उल्टा पुल्टा' में भी यही अंदाज था। जसपाल भट्टी ने कई अन्य शो भी बनाए और पेश किए, जैसे 'फुल टेंशन', 'हाय जिंदगी बाय जिंदगी', 'थैंक यू जीजा जी'। जसपाल टीवी शो तक सीमित नहीं थे। उन्होंने पंजाबी और हिंदी फिल्मों में भी काम किया। साल 1999 में आई पंजाबी फिल्म 'माहौल ठीक है' में उन्होंने पुलिस और कानून व्यवस्था पर करारा व्यंग्य किया। उन्होंने 'कुछ मीठा हो जाए', 'आ अब लौट चलें', 'इकबाल' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया।

जसपाल भट्टी की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह आम जनता की भाषा में बोलते थे, उनकी समस्याओं को समझते थे और बिना किसी कटुता के सिस्टम पर तंज कसते थे। यही वजह थी कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब उन्हें पसंद करते थे।

25 अक्टूबर 2012 को एक सड़क हादसे में जसपाल भट्टी हम सबको छोड़कर चले गए। उनके निधन ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। आज भी जब 'फ्लॉप शो' के कोई भी पुराने एपिसोड दिखते हैं, तो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

--आईएएनएस

एमटी/एबीएम