Aapka Rajasthan

क्रिप्टो के जरिए अवैध सीमा पार लेनदेन का आरोप, ईडी ने मड्रेक्स से जुड़ी कंपनी के ठिकानों पर की छापेमारी

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन के जरिए कथित तौर पर अनधिकृत सीमा पार धन हस्तांतरण और वित्तीय लेनदेन के मामले में कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 27 अक्टूबर को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर तलाशी ली।
 

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन के जरिए कथित तौर पर अनधिकृत सीमा पार धन हस्तांतरण और वित्तीय लेनदेन के मामले में कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 27 अक्टूबर को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर तलाशी ली।

ईडी के अनुसार, यह जांच बेंगलुरु स्थित कंपनी एम/एस आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर शुरू की गई। आरोप है कि कंपनी 'मड्रेक्स'' और 'सेबर मनी' नाम से प्लेटफॉर्म संचालित करती है और इनके माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर अनधिकृत सीमा पार लेनदेन तथा क्रिप्टो ट्रेडिंग की जाती है।

जांच एजेंसी ने बताया कि शुरुआती गोपनीय जांच और जुटाई गई खुफिया जानकारी से संकेत मिले कि कंपनी क्रिप्टो टोकन, विशेषकर यूएसडीटी और यूएसडीसी जैसे स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल कर सीमा पार धन हस्तांतरण की ऐसी व्यवस्था चला रही थी, जिससे अधिकृत माध्यमों को दरकिनार किया जा सके। ईडी को संदेह है कि इस तरीके से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा था।

ईडी के मुताबिक, संबंधित कंपनी इंटरनेट पर अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा का प्रचार कर रही थी। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अधिकृत हुए बिना सीमा पार भुगतान से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने की पेशकश कर रही थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी की वेबसाइटों पर पारंपरिक मुद्रा को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने, क्रिप्टो खरीदने-बेचने और अलग-अलग क्रिप्टो टोकन के बीच अदला-बदली करने की सेवाओं का प्रचार किया जा रहा था। इन सेवाओं के जरिए पारंपरिक मुद्रा को क्रिप्टो में बदलकर दूसरे देश में भेजने और फिर उसे स्थानीय मुद्रा में बदलने की सुविधा दी जा सकती है।

ईडी ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था के जरिए सीमा पार धन हस्तांतरण के लिए अधिकृत माध्यमों को दरकिनार किए जाने की आशंका है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए इन लेनदेन में फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। ईडी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ऑन-रैंप ऐसी सेवा है, जिसके जरिए भारतीय रुपये, अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक मुद्राओं को बिटकॉइन या यूएसडीटी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट में बदला जाता है।

वहीं, ऑफ-रैंप सेवा के जरिए क्रिप्टोकरेंसी को बेचकर प्राप्त राशि बैंक खाते में निकाली जा सकती है। इन दोनों सेवाओं के माध्यम से पारंपरिक मुद्रा और क्रिप्टोकरेंसी के बीच लेनदेन संभव होता है। ईडी के मुताबिक, जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि इन सेवाओं का इस्तेमाल कथित तौर पर अधिकृत सीमा पार धन हस्तांतरण व्यवस्था को दरकिनार करने के लिए किस तरह किया जा रहा था। फिलहाल, एजेंसी ने तलाशी के दौरान बरामदगी या जांच के अन्य निष्कर्षों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

डीएससी