कोर स्ट्रेंथ और डाइजेशन को मजबूत बनाना है? रोज करें नौका संचालनासन का अभ्यास
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। आधुनिका जीवनशैली, घटती शारीरिक सक्रियता और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत ने हमारी कोर स्ट्रेंथ और पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। ऐसी स्थिति में 'नौका संचालनासन' एक अत्यंत प्रभावकारी योगाभ्यास है।
'नौका संचालनासन' संस्कृत शब्द है, जो 'नौका' (नाव), 'संचालन' और 'आसान' मुद्रा से मिलकर बना हुआ है। यह गतिशीलता पर आधारित एक ऐसा आसन है, जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाते के साथ शरीर में नई ऊर्जा का संचार भी करता है।
इसे करने के लिए सबसे मैट पर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाकर (दंडासन की मुद्रा में) बैठ जाएं। अपनी मुट्ठी को इस तरह बंद करें जैसे आप नाव का चप्पू पकड़ रहे हों। बाहों को सीधा रखते हुए शरीर को जितना हो सके पीछे की ओर ले जाएं और नाभि पर खिंचाव महसूस करें। कमर से आगे की ओर झुकें और हाथों को गोलाकार घुमाते हुए पैरों की उंगलियों की तरफ ले जाएं, ठीक वैसे ही जैसे नाव चलाते समय चप्पू चलाते हैं। इस गोलाकार प्रक्रिया को 8 से 10 बार (चक्र) दोहराएं। इसके बाद, प्रक्रिया को उल्टी दिशा में भी 8 से 10 बार दोहराएं। गर्भवती महिलाओं (विशेषकर दूसरी और तीसरी तिमाही में), स्लिप डिस्क या रीढ़ की गंभीर समस्याओं से पीड़ित लोगों, और पेट या कूल्हे की सर्जरी कराने वाले लोगों को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन एक बेहतरीन सूक्ष्म व्यायाम है, जो पूरे शरीर को खींचता, मजबूत बनाता और लचीला करता है। इस अभ्यास से पेट, कमर, पेल्विस, पीठ का निचला हिस्सा, पैर, छाती, कंधे और कूल्हे सक्रिय होते हैं। इससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है, ताकत बढ़ती है और आत्मविश्वास में भी सुधार आता है। नियमित अभ्यास करने से शरीर अधिक लचीला बनता है और जोड़ों की गति (रेंज ऑफ मोशन) भी बेहतर होती है। इसको करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने लगता है। साथ ही, शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स बाहर आ जाते हैं।
अगर कोई व्यक्ति अनिद्रा जैसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह आसन आपके लिए बेहद लाभकारी है। इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, तंत्रिका तंत्र शांत रहती है।
--आईएएनएस
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