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जेपीएससी विवाद : रांची में आंदोलनकारी छात्रों का ऐलान, 'धैर्य की सीमा पार, सरकार फैसला ले'

रांची, 10 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
 

रांची, 10 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने हेमंत सोरेन सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य के युवा नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छात्र वर्षों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नौकरी के बजाय दूसरे काम करने की सलाह दी जा रही है। छात्र ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन अब काफी मजबूत हो चुका है और सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए। यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो छात्र सरकार की कुर्सी तक छीनने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

एक अन्य छात्र ने कहा कि हमारा उद्देश्य कानून तोड़ना नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर छात्रों को कानून तोड़ने की स्थिति में किसने पहुंचाया? यदि सरकार और प्रशासन उनकी बात पहले सुनती तो उन्हें इस तरह सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। वे सुबह से प्रदर्शन स्थल पर बिना कुछ खाए-पिए बैठे हैं। छात्रों की भी सहन करने की एक सीमा होती है और वह सीमा पार हो चुकी है। छात्र ने स्पष्ट किया कि छात्रों को लड़ाई-झगड़े का कोई शौक नहीं है। वे पढ़ने वाले युवा हैं और उनका उद्देश्य शिक्षा हासिल करना, परीक्षा देना और रोजगार प्राप्त करना है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि उनके पास विधानसभा की ओर आगे बढ़ने की क्षमता है, लेकिन वे जानबूझकर संयम बरत रहे हैं। एक छात्र ने कहा कि आंदोलन के पहले दिन से ही छात्र इसे गांधीवादी आंदोलन बताते आए हैं। छात्रों का दावा है कि उन्होंने अब तक शांति और संयम के साथ प्रदर्शन किया है। सरकार को चेतावनी देते हुए छात्र ने कहा कि उनके धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए। उनके नेता पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी हालत गंभीर हो चुकी है। ऐसे में सरकार को स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल बातचीत और समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान एक छात्र ने कहा कि छात्रों के विधानसभा पहुंचने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा है। छात्र अपना गुस्सा दिखाने के लिए विधानसभा पहुंचे हैं, लेकिन वे किसी तरह की अराजकता पैदा नहीं करना चाहते। बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की क्षमता होने के बावजूद वे ऐसा नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे बागी नहीं हैं। छात्र पढ़ने वाले हैं और उनकी नाराजगी का मुख्य कारण रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता है।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र मौजूद होने के बावजूद उन्होंने संयम बनाए रखा। उन्होंने दावा किया कि छात्रों ने न तो कोई आपत्तिजनक नारा लगाया और न किसी तरह का उपद्रव किया। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के मौजूद रहने के बावजूद अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अनुशासित है, तो यह झारखंड के छात्रों की विशेषता है। अब गेंद सरकार के पाले में नहीं है। सरकार को तय करना है कि वह छात्रों की मांगों पर आगे क्या फैसला लेती है।

उन्होंने कहा कि छात्रों का काम विधानसभा का घेराव करना या प्रशासन से इस तरह बातचीत करना नहीं है। छात्रों का मूल काम पढ़ाई करना, परीक्षा देना और नौकरी हासिल करना है। प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाएं होंगी और युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे, तो छात्र आखिर क्या करेंगे। यह केवल उनकी व्यक्तिगत आवाज नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज है, जिनका भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर है।

उन्होंने पुलिस और प्रशासन में मौजूद कर्मियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनमें से भी बड़ी संख्या में लोग प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए अपने पदों तक पहुंचे हैं। आज का युवा उम्मीद और सपने किताबों में देखता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करके भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उसी युवा के रोजगार और सपने से जुड़े अवसर प्रभावित होंगे तो वह क्या करेगा? छात्रों की मौजूदा स्थिति को इसी संदर्भ में समझने की जरूरत है।

छात्र नेता ने कहा कि अब छात्रों के साथ केवल बातचीत या समय की चर्चा करने का वक्त नहीं है, बल्कि उनकी मांगों पर ठोस घोषणा करने का समय है। उन्होंने झारखंड में पेपर लीक की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि राज्य में यह मुद्दा लंबे समय से युवाओं को परेशान कर रहा है। महतो ने बताया कि वह स्लाइन चढ़ाकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं। अगर छात्रों की नौकरी और उनके सपनों के साथ खिलवाड़ होता है, तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को तत्काल स्वीकार करने और रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम