कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने ब्रिक्स डिनर का किया बहिष्कार: संबित पात्रा
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजित रात्रिभोज में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसी अंतरराष्ट्रीय बैठक किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं होती, बल्कि यह देश के गौरव, विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका से जुड़ा आयोजन है। पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के डिनर में शामिल नहीं होने से गलत संदेश गया है और इससे कांग्रेस की दलगत राजनीति की मानसिकता सामने आती है।
संबित पात्रा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हाल ही में ब्रिक्स की बैठक संपन्न हुई, जिसमें भारत ने मेजबानी की। इस दौरान पूरी दुनिया ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और देश की छवि को देखा। ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों का भारत आना देश के लिए महत्वपूर्ण अवसर था। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होती है और विभिन्न देशों के साथ संवाद तथा सहयोग के नए रास्ते खुलते हैं। इस तरह के आयोजन को किसी राजनीतिक दल की बैठक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ब्रिक्स का उद्देश्य भारत और अन्य सदस्य देशों के बीच सहयोग तथा वैश्विक स्तर पर साझा मुद्दों पर आगे बढ़ना है।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि ब्रिक्स से जुड़े रात्रिभोज के लिए देश के सभी मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। निमंत्रण में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी सम्मानपूर्वक निमंत्रण भेजा गया था। उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी ओर से 12 तारीख को कार्यक्रम में शामिल होने की पुष्टि भी भेजी गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने डिनर में शामिल होने में असमर्थता जताई।
पात्रा ने कहा कि केरल और कर्नाटक से जुड़े कांग्रेस नेताओं की भी रात्रिभोज में गैरमौजूदगी रही। उन्होंने इसे लेकर सवाल उठाया कि यदि यह राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम था तो विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को इसमें शामिल होना चाहिए था।
संबित पात्रा ने कहा कि ब्रिक्स की बैठक को कांग्रेस या भाजपा के चश्मे से देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह देश की प्रतिष्ठा और विकास से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है। ऐसे अवसरों पर अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं के बीच संवाद का अवसर मिलता है। रात्रिभोज जैसे कार्यक्रमों में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत भी होती है। ऐसे मंच पर यह महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए कि कौन किस राजनीतिक दल से संबंधित है। प्राथमिकता भारत के हित, विकास और वैश्विक स्तर पर देश की भूमिका को मजबूत करना होना चाहिए।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी को एक तरह का बहिष्कार बताते हुए कहा कि इससे देश के लोगों के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अभी भी दलगत राजनीति से ऊपर उठने की मानसिकता विकसित नहीं कर पाई है। ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से जुड़े आयोजन में राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर देशहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक छवि से जुड़े कार्यक्रमों में सभी राजनीतिक दलों को सहयोग की भावना के साथ आगे आना चाहिए। ऐसे आयोजनों में भागीदारी देश की एकजुटता का संदेश भी देती है।
संबित पात्रा ने इस मुद्दे को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भले ही मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन पार्टी का वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व राहुल गांधी के हाथ में है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राजनीतिक सोच दलगत विरोध से ऊपर नहीं उठ पा रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक शैली में बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा कि केवल राजनीतिक मतभेदों के कारण राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों से दूरी बनाना उचित नहीं है।
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि किसी भी देश या राजनीतिक दल के लिए आगे बढ़ने के लिए व्यापक सोच जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। पात्रा ने कहा कि भारत जब वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब राजनीतिक दलों से भी सहयोग और सकारात्मक भागीदारी की अपेक्षा होती है। छोटे राजनीतिक दायरे में रहकर देश को आगे नहीं ले जाया जा सकता और कांग्रेस को अपना दृष्टिकोण व्यापक करने की जरूरत है।
--आईएएनएस
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