कश्मीर में सकारात्मक बदलाव को सब पसंद कर रहे, हो रहा तीव्र विकास : अनिका नजीर
श्रीनगर, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोफेशनल अनिका नजीर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में कश्मीर की संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, शांति, विकास और युवाओं के लिए अवसरों पर बात है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए अनिका नजीर ने कहा, "मेरा मानना है कि एक कश्मीरी के लिए ऐसा मंच होना बहुत जरूरी है जहां वे अपनी कहानियां खुद आगे बढ़ा सकें और अपनी यात्रा को दुनिया के सामने अपनी आवाज में पेश कर सकें। हमारे यहां साहित्य, शिक्षा और गहरी सांस्कृतिक विरासत की एक लंबी परंपरा रही है। जब हम शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में इतने समृद्ध हैं, तो मेरा मानना है कि हमें वैश्विक मंच पर अपनी आवाज खुद उठानी चाहिए। इसलिए, मेरे लिए यह एक शानदार मौका और बहुत अच्छा अनुभव था। खासकर, उस मंच पर महिलाओं की आवाज को उठाना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।"
उन्होंने कहा, "बहुत से लोगों को यह अंदाजा नहीं होता कि उस मंच पर बोलने के लिए असल में कितना समय मिलता है। यूएनएचआरसी में कई अलग-अलग मंच और बैठकें होती हैं, जहां सिविल सोसाइटी और युवाओं के प्रतिनिधियों को बोलने का मौका मिलता है, और 90 सेकंड दिए जाते हैं। उन 90 सेकंड में अपने विचार रखने होते हैं और जिस मुद्दे को आप उठाना चाहते हैं, उसका संक्षिप्त विवरण देना होता है। इसलिए, ये 90 सेकंड यह तय करने में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं कि आपको कौन-कौन सी बातें सामने रखनी हैं।"
आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर में आए बदलावों को युवा महिला के तौर पर कैसे देखने के सवाल पर अनिका नजीर ने कहा, "मेरा मानना है कि पहले जो खालीपन और खतरे का अहसास था, उसमें काफी कमी आई है। युवा, खासकर 'जेन-जी' और अब बड़े हो रहे युवा जैसे 'जेन अल्फा' और 'जेन बीटा' और आने वाली पीढ़ियां, इस माहौल पर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इन बच्चों ने संघर्ष का दौर नहीं देखा है। अब सकारात्मक बदलाव को सब पसंद कर रहे हैं।"
ग्लोबल मंचों पर कश्मीर को 'विवादित' जमीन बताने वाली बात पर अनिका नजीर ने कहा, "मेरा मानना है कि कश्मीर की तरक्की और विकास उन लोगों के लिए एक अहम सच्चाई है, जिन्होंने इस इलाके को मुख्य रूप से अस्थिरता और संघर्ष के नजरिए से देखा है। जिन लोगों ने आतंकवाद का समर्थन या उसे फंडिंग की और इस इलाके को अस्थिर बनाए रखना चाहा, उनके लिए यह बात बहुत मायने रखती है कि इतने लंबे समय तक चले संघर्ष के बावजूद यहां के लोग आगे बढ़ रहे हैं। जो यहां अस्थिरता फैलाना चाहते हैं, उनके लिए यह बड़ी हार है।"
अनिका नजीर ने कहा, "जब भी कश्मीर का जिक्र होता है, तो सबसे पहले मन में कश्मीर की छवि या उसे किस नजरिए से देखा जाता है, यही बात आती है। एक कश्मीरी होने के नाते (जो कश्मीर में ही पैदा हुआ, पला-बढ़ा और यहीं रहता और काम करता है) मुझे लगा कि खासकर जब मैं पहली बार किसी ग्लोबल मंच पर अपनी बात रख रही थी, तो इस फर्क को उजागर करना बहुत जरूरी था। मैंने वहां एक बात कही थी कि कश्मीर को सिर्फ जियो-पॉलिटिकल नैरेटिव (भू-राजनीतिक नजरिए) तक सीमित न रखें। मैंने वहां कहा कि शांति संभव है।"
अनिका नजीर ने कहा, "मेरा मानना है कि विकास और तरक्की कोई एक बार होने वाली प्रक्रिया नहीं है। ये लंबी अवधि तक चलने वाली प्रक्रियाएं हैं जो जीवन भर जारी रहती हैं। कश्मीर ने एक ऐसा दौर देखा है जब शायद हम देश और दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में पीछे रह गए। हमारे युवाओं ने लंबे समय तक मुश्किलों का सामना किया है। दो-तीन पीढ़ियां ऐसे दौर से गुजरी हैं कि उस समय का सदमा लगभग हर घर तक पहुंच गया है। अब जब हम अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं, तो हमें अपनी तरक्की और विकास को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। जहां भी और जब भी संभव हो, युवाओं और सभी पीढ़ियों के लोगों को अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि हम आगे बढ़ सकें और हर दिन, हर पल और हर मिनट बेहतर कर सकें।"
अनिका नजीर ने कहा, "मेरा मानना है कि कश्मीर का अपना एक इतिहास है। भले ही यहां तीन दशकों से ज्यादा समय से आतंकवाद का प्रभाव हो लेकिन इससे वह इतिहास मिट नहीं जाता जो उन तीन दशकों से पहले का है। वह इतिहास हमारी पहचान और हमारे अस्तित्व का हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर और खासकर कश्मीर से महान सूफी संत और महान लेखक निकले हैं। आज मैं लोगों को आगे बढ़ते हुए देख रही हूं। मेरा मानना है कि कश्मीर में एक बड़े केंद्र के तौर पर विकसित होने की जबरदस्त क्षमता है, ठीक वैसे ही जैसे दुनिया भर के अन्य क्षेत्र और राज्य विकसित हुए हैं। असल में, मेरा तो यह भी मानना है कि कश्मीर में और भी आगे जाने और लगातार विकास करते रहने की क्षमता है।"
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी हाल की घटनाओं और ज्यादा सख्त कानूनों की जरूरत के सवाल पर अनिका नजीर ने कहा, "सिर्फ एक महिला के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी, मैं न्याय व्यवस्था से एक गुजारिश करना चाहती हूं। हमारे संविधान में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पहले से ही कई कानून मौजूद हैं। लेकिन उनसे भी ज्यादा जरूरी है उनका सही तरीके से लागू होना। न्याय व्यवस्था इतनी संवेदनशील और तेज होनी चाहिए कि कोई महिला न्यायपालिका के पास जाने से डरे नहीं, सिर्फ इसलिए नहीं कि उसे डर है कि उसका केस सालों तक चलता रहेगा और वह उसी चक्र में फंसी रहेगी। महिलाओं को घर से बाहर जाने में डर न लगे कि चार लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे, वह खुद को सशक्त महसूस करें।"
उन्होंने कहा, "सशक्तीकरण का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि महिलाओं को मदद मिल रही है। सशक्तीकरण का अर्थ यह भी है कि समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं को बराबरी का स्थान मिल रहा है। महिलाएं अब उद्यमिता में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। वे स्टार्टअप इकोसिस्टम में कदम रख रही हैं और सफलतापूर्वक अपने खुद के बिजनेस खड़ी कर रही हैं। मेरा मानना है कि समाज का यह पहलू अब पहले की तुलना में कहीं अधिक दिखाई देता है। इसके अलावा, हाल की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और बड़ी संख्या में महिलाएं इन परीक्षाओं में सफल हो रही हैं। चाहे नीट हो, हायर सेकेंडरी परीक्षाएं हों या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं, महिलाएं हर जगह अपनी पहचान बना रही हैं।"
--आईएएनएस
एसडी/पीएम
