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कोल्ड ड्रिंक केन से बना भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ, 25 घंटे की मेहनत से किया गया तैयार

गंजाम, 17 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के बरहमपुर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रेत कलाकार सत्य नारायण महाराणा ने इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर अपनी अनूठी कला का एक और अद्भुत नमूना प्रस्तुत किया है। उन्होंने एक साधारण कोल्ड ड्रिंक केन का उपयोग कर भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ की अत्यंत सूक्ष्म और आकर्षक प्रतिकृति तैयार की है। यह कलाकृति अपनी बारीक कारीगरी और वास्तविक रथ से मिलती-जुलती संरचना के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
 

गंजाम, 17 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के बरहमपुर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रेत कलाकार सत्य नारायण महाराणा ने इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर अपनी अनूठी कला का एक और अद्भुत नमूना प्रस्तुत किया है। उन्होंने एक साधारण कोल्ड ड्रिंक केन का उपयोग कर भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ की अत्यंत सूक्ष्म और आकर्षक प्रतिकृति तैयार की है। यह कलाकृति अपनी बारीक कारीगरी और वास्तविक रथ से मिलती-जुलती संरचना के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

सत्य महाराणा द्वारा तैयार किए गए इस नंदीघोष रथ की ऊंचाई लगभग साढ़े पांच इंच तथा चौड़ाई लगभग साढ़े चार इंच है। इस लघु रथ में वास्तविक नंदीघोष रथ की तरह 16 चक्र (पहिए), चार घोड़े, दो उल्टा सुआ, सारथी तथा स्वयं महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को भी अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा गया है। इस उत्कृष्ट कलाकृति को तैयार करने में उन्हें करीब 25 घंटे का समय लगा।

सत्य नारायण महाराणा ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 से भगवान जगन्नाथ के लघु रथों का निर्माण शुरू किया था। वर्ष 2020 में उन्होंने दुनिया का सबसे छोटा जगन्नाथ रथ बनाकर विश्व स्तर पर पहचान बनाई। उनकी इस उपलब्धि को एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित कई प्रतिष्ठित रिकॉर्ड पुस्तकों में स्थान मिला। इसके बाद उन्होंने हर वर्ष कुछ नया और अलग करने का संकल्प लिया।

उन्होंने बताया कि अब तक वे बांस, बोतल, आइसक्रीम स्टिक, पुराने समाचार पत्र और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों से भी भगवान जगन्नाथ के लघु रथ बना चुके हैं। इस वर्ष उन्होंने पहली बार कोल्ड ड्रिंक केन का उपयोग कर नंदीघोष रथ तैयार किया है।

साल 2000 से सत्य महाराणा दुनिया के सबसे छोटे रथ बनाने की दिशा में लगातार प्रयोग कर रहे हैं। उनकी कला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि भारतीय शिल्पकला और नवाचार का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। रथ यात्रा जैसे पावन अवसर पर उनकी यह विशेष प्रस्तुति श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम