कॉकरोच जनता पार्टी का 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान, सुविधाओं की कमी पर उठाए सवाल
नागपुर, 16 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में आदिवासी स्कूलों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बच्चों को स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था, दवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस दौरान दिपके ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी स्कूलों की स्थिति को लेकर 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने जा रही है। पिछले कुछ दिनों में आदिवासी बच्चों और उनके स्कूलों की जो स्थिति सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। कई आदिवासी स्कूलों की इमारतों और वहां उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति ऐसी है कि वे बच्चों के पढ़ने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। जिन परिस्थितियों में आदिवासी बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी दिखाई देती है।
उन्होंने स्कूलों में बच्चों के रहने और सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। दिपके ने कहा कि कई जगह बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है और पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी परिस्थितियों के कारण बच्चों को सांप के काटने जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है तो इसके कारणों और स्कूलों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की गंभीरता से जांच क्यों नहीं हो रही है। भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और रहने की व्यवस्था में कमी का सीधा असर बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
बालाघाट क्षेत्र का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा किया कि वहां पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार जनवरी से अब तक 100 से अधिक बच्चों की मौत हुई है और इस मुद्दे पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। दिपके ने आदिवासी स्कूलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं और जरूरी दवाओं की भी कमी है। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है।
उन्होंने इसे सरकारी स्तर पर लापरवाही और चिकित्सा व्यवस्था की कमी से जोड़ते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। केवल स्कूलों में बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिलनी चाहिए।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आदिवासी समुदाय का देश के संसाधनों पर महत्वपूर्ण अधिकार है और शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आदिवासी बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वे आगे बढ़ सकें और बेहतर अवसर हासिल कर सकें। इसी उद्देश्य से हमारी पार्टी आदिवासी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने और उनमें सुधार की मांग को लेकर अभियान शुरू कर रही है।
--आईएएनएस
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