फिर से उड़ान भरने लगे कोस्ट गार्ड के एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर ‘ध्रुव’, क्रैश के बाद से हो गए थे ग्राउंडेड
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। पांच जनवरी 2025 को पोरबंदर में कोस्ट गार्ड का एएलएच (एएलएच) क्रैश हो गया था। इस हादसे के बाद भारतीय सेना के तीनों अंगों और कोस्ट गार्ड में शामिल 300 से ज्यादा एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टरों को ग्राउंड कर दिया गया था। करीब 15 महीने बाद अब कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलिकॉप्टर फिर से उड़ान भरने लगे हैं।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों से इन्हें चरणबद्ध तरीके से उड़ाया जा रहा है। सबसे पहले इसकी शुरुआत कोच्चि से की गई, इसके बाद भुवनेश्वर और फिर चेन्नई स्थित कोस्ट गार्ड बेस से उड़ान शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार, अगले चरण में पोरबंदर में भी इनकी उड़ान शुरू होगी।
हेलिकॉप्टरों को एक निर्धारित समय सीमा के तहत उड़ाया जा रहा है। करीब 100 घंटे की उड़ान के बाद इनकी फिर से जांच की जाएगी। आमतौर पर हर हेलिकॉप्टर, फाइटर या ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का तय उड़ान घंटों के बाद निरीक्षण होता है, लेकिन इस मामले में यह निरीक्षण सामान्य से पहले किया जाएगा। नौसेना के ध्रुव हेलीकॉप्टर को भी उड़ान की मंजूरी मिल चुकी है। फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के दौरान भी नौसेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर उड़ान भरते नजर आए थे, लेकिन यह भी चरणबद्ध तरीके से ही उड़ान भर रहे हैं।
पोरबंदर में कोस्ट गार्ड के एएलएच क्रैश के बाद तीनों सेनाओं और कोस्ट गार्ड के पूरे एएलएच फ्लीट को ग्राउंड कर दिया गया था। एचएएल की डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन टीम की गहन जांच के बाद 1 मई को थलसेना और वायुसेना के सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई थी। हालांकि, कोस्ट गार्ड और नौसेना के एएलएच को तत्काल मंजूरी नहीं मिली थी।
इसका कारण यह है कि कोस्ट गार्ड और नौसेना के हेलिकॉप्टर समुद्र के ऊपर ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए होते हैं। समुद्री उड़ान के लिए इन हेलिकॉप्टरों में अलग प्रकार के सेंसर लगे होते हैं। इसके अलावा, इन्हें युद्धपोतों के डेक पर लैंड करना होता है, इसलिए इनका अंडरकैरेज और ‘ओवर-द-नोज’ विजन बेहतर बनाया जाता है।
समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग की स्थिति में इन हेलिकॉप्टरों में फ्लोटेशन डिवाइस लगे होते हैं, जिससे वे तुरंत डूबते नहीं हैं। फिलहाल कोस्ट गार्ड के पास 18 एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टर हैं, और 6 अतिरिक्त एएलएच की खरीद का करार भी हो चुका है। वहीं, नौसेना के पास भी 18 एएलएच मौजूद हैं। भारतीय सेना में एएलएच के विभिन्न वर्जन शामिल हैं- मार्क 1, मार्क 2, मार्क 3 और मार्क 4 (वेपनाइज्ड वर्जन ‘रुद्र’)।
एएलएच सेना की लाइफलाइन माने जाते हैं। भारतीय थलसेना सबसे अधिक, लगभग 145 एएलएच हेलिकॉप्टर ऑपरेट करती है, जिनमें से 75 वेपनाइज्ड वर्जन (एएलएच मार्क 4 ‘रुद्र’) हैं। थलसेना ने 25 अतिरिक्त एएलएच मार्क 3 का ऑर्डर एचएएल को दिया है। वहीं, भारतीय वायुसेना के पास करीब 70 ध्रुव हेलिकॉप्टर हैं।
--आईएएनएस
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