सीएम धामी का कांग्रेस पर हमला, उत्तराखंड में भाजपा चलाएगी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान
देहरादून, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है, लेकिन कांग्रेस अपनी चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि भाजपा 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रदेशभर में दो चरणों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाएगी।
सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि जनता के निर्णय पर सवाल उठाने और हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने की राजनीति को अब तथ्यों के साथ जनता के सामने बेनकाब किया जाएगा।
इसी उद्देश्य से भाजपा 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रदेशभर में दो चरणों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाएगी। प्रथम चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तथा द्वितीय चरण 11 नवंबर से 30 नवंबर तक संचालित होगा। इस दौरान प्रदेश के सभी 13 जनपदों में पदयात्राओं और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पहुंचकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी और केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा, लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार की आलोचना करना उसका अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। लोकतंत्र की आड़ में अव्यवस्था फैलाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर जवाब दिया जाएगा।
पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस के वोट चोरी को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मेरा जन्म पिथौरागढ़ में हुआ था। बाद में जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने खटीमा क्षेत्र में पढ़ाई की और वहीं अपने काम का विस्तार किया। फिलहाल मैं चंपावत निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हूं। अब देहरादून में अपनी जिम्मेदारियों के कारण मैं नियमित रूप से देहरादून में ही रहता हूं। ऐसे में मेरा मतदाता पंजीकरण पिथौरागढ़, चंपावत या देहरादून—इनमें से कहां होना चाहिए? मैंने हमेशा खटीमा में ही वोट दिया है, जहां मेरी मां रहती हैं और जहां मेरा परिवार शुरू से रहा है। चूंकि मेरा नाम देहरादून के साथ-साथ पिथौरागढ़ और चंपावत की मतदाता सूची में भी आ गया था—जहां लोगों ने सुझाव दिया था कि मेरा वोट वहां भी हो सकता है—इसलिए हमने तीनों जगहों पर अपने मतदाता पंजीकरण को व्यवस्थित और दुरुस्त करवा लिया।" सीएम ने कहा ऐसे में मुझे क्या आपत्ति होनी चाहिए?
उन्होंने दूसरा उदाहरण देते हुए कहा कि कोई बेटी है, उसका विवाह देहरादून से सहारनपुर हो गया या किसी दूसरे शहर-राज्य में हो गया। उसका वोट देहरादून से उस शहर या राज्य से जुड़ जाएगा जहां उसकी शादी हुई है। उसका बेटी का नाम देहरादून की मतदाता सूची में नाम क्यों होना चाहिए? इसमें किसी को क्या परेशानी हो सकती है। अगर चुनाव में हार जीत की बात है तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 2024 के बाद पद पर आए हैं। कांग्रेस पार्टी की हार लगातार कई सालों से हो रही है। कई राज्यों में कांग्रेस दशकों से सत्ता के लिए संघर्ष कर रही है।
सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस का ओडिशा में 26 साल, गुजरात में 41 साल पहले, उत्तर प्रदेश में 37 साल, बिहार में 36 साल,त्रिपुरा में 33, पश्चिम बंगाल में 49 साल और तमिलनाडु में 59 साल से पहले सफाया हो गया था। कांग्रेस इसका ठीकरा किस पर फोड़ेगी?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनादेश का सम्मान नहीं करती और अपनी असफलता का दोष व्यवस्था पर थोपने का काम करती है। लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना चाहिए। संविधान हाथ में लेकर आचरण किस तरह का है, इसको सभी लोग देख रहे हैं। संविधान की प्रति लेकर चलना आसान है, लेकिन उनके अनुरूप चलना सीखना चाहिए।
--आईएएनएस
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