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सीआईडी जांच में लीपापोती होगी, इसलिए सीबीआई से डर रही जेएमएम सरकार : भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज और बंद के ऐलान को लेकर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने जेएमएम सरकार और सपा दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जेएमएम तानाशाही के रास्ते पर चल रही है और सीआईडी जांच में लीपापोती हो रही है, इसलिए सरकार सीबीआई जांच से डर रही है।
 

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज और बंद के ऐलान को लेकर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने जेएमएम सरकार और सपा दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जेएमएम तानाशाही के रास्ते पर चल रही है और सीआईडी जांच में लीपापोती हो रही है, इसलिए सरकार सीबीआई जांच से डर रही है।

भाजपा सांसद ने सपा से सवाल किया कि अगर वो छात्रों के समर्थन में हैं तो इस मुद्दे को लोकसभा में तख्ती और फ्लैग्स के साथ क्यों नहीं उठाया?

भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा, "सपा को इस मुद्दे को लोकसभा में उठाना चाहिए था। इसका विरोध करना चाहिए था। अगर वो जेएमएम सरकार के विरूद्ध और छात्रों के समर्थन में हैं, तो सपा को तख्ती और फ्लैग्स लेकर सदन के अंदर जिस तरह से दूसरी चीजों का विरोध करते हैं, वैसे ही इसका भी विरोध करना चाहिए था।"

जेपीएससी, जेएसएससी अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में बंद के ऐलान और छात्रों की मांग को लेकर उन्होंने कहा कि जिस तरह से सीआईडी जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, और सीएम के अत्यंत करीबी लोग उसमें शामिल दिख रहे हैं। सीआईडी जांच में अगर लीपापोती होगी, तो इसलिए सीबीआई जांच से प्रदेश सरकार डर रही है। उन्हें लग रहा है कि अगर सीबीआई जांच होगी तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

उन्होंने कहा, "अभिजीत दिपके किस एजेंडे पर चल रहे हैं, उनके पीछे कौन सी ताकतें खड़ी हैं, ये सबको पता है। दिपके रांची नहीं जा सकते तो क्या सीजेपी से कोई भी नहीं जा सकता था? ये सब अपना चेहरा बचाने के लिए बोल रहे हैं। अगर उन्हें समर्थन देना होता, तो वो झारखंड जाते।"

उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दलों के सदस्य मांग कर रहे थे कि सदन में आएं, चर्चा हो, बयान दें, लेकिन अब वो कहते हैं कि नहीं, मेरे दो प्रश्न हैं, उसका हां या ना में बयान दें, बस हो गया। ये तो कांग्रेस पार्टी का स्वभाव रहा है कि वो कहकर बार-बार अपना रुख बदलते रहते हैं। बयान के समय अपनी बात कह गए और जब सत्तापक्ष की बारी आई, तो वो शोर मचाकर चले जाते हैं।

इस्कॉन मंदिर में ड्रेस कोड को लेकर उन्होंने कहा कि ये उनकी निजी व्यवस्था है। उनकी परंपराओं के अनुकूल वो जो समझते होंगे, उस हिसाब से निर्णय लिया है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम