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चुनाव प्रक्रिया में हुई धोखाधड़ी और गड़बड़ी, ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा: वारिस पठान

मुंबई, 30 सितंबर (आईएएनएस)। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने चुनाव आयोग, मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता की हत्या और दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में उमर खालिद तथा शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
 

मुंबई, 30 सितंबर (आईएएनएस)। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने चुनाव आयोग, मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता की हत्या और दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में उमर खालिद तथा शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि संविधान हर नागरिक को विरोध करने का अधिकार देता है और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को इसी अधिकार के तहत देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग को लेकर पठान ने आरोप लगाया कि आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया में धोखाधड़ी और गड़बड़ी की गई है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से लोग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। जिन लोगों के निर्देश पर चुनाव आयोग ने काम किया, उनके खिलाफ भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मामला लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। पठान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताते हुए दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का वोट देने का अधिकार प्रभावित होता है तो इसे लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना पर वारिस पठान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंबई में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं और ऐसे में पुलिस तथा प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठता है।

पठान ने कहा कि फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जो भी व्यक्ति इस तरह की घटना में शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट के इनकार पर भी पठान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कानून के सामान्य सिद्धांत के अनुसार जमानत नियम और जेल अपवाद है तथा किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।

पठान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हिरासत में है, लेकिन उसका मुकदमा आगे नहीं बढ़ रहा और उसे जमानत भी नहीं मिल रही, तो इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि उमर खालिद लंबे समय से हिरासत में हैं और उनके अनुसार मामले में अभी तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ है।

--आईएएनएस

एसएके/एमएस