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चुनाव हारने वाले टीएमसी प्रत्याशियों ने नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने की ममता की अपील को किया नजरअंदाज

कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। संकटग्रस्त ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में विधानसभा चुनावों में पराजित हुए पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों ने चुनाव परिणामों को अदालत में चुनौती न देने का फैसला किया है। इस प्रकार उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बार-बार कानूनी उपाय अपनाने की अपील के बावजूद जनता के जनादेश को प्रभावी रूप से स्वीकार कर लिया है।
 
चुनाव हारने वाले टीएमसी प्रत्याशियों ने नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने की ममता की अपील को किया नजरअंदाज

कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। संकटग्रस्त ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में विधानसभा चुनावों में पराजित हुए पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों ने चुनाव परिणामों को अदालत में चुनौती न देने का फैसला किया है। इस प्रकार उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बार-बार कानूनी उपाय अपनाने की अपील के बावजूद जनता के जनादेश को प्रभावी रूप से स्वीकार कर लिया है।

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, विधानसभा चुनाव में पराजित हुए 211 टीएमसी उम्मीदवारों में से 203 उम्मीदवारों (96.20 प्रतिशत) ने अपनी हार को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर नहीं की है।

अब तक टीएमसी नेताओं की ओर से केवल आठ चुनाव याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें से एक याचिका स्वयं ममता बनर्जी ने दायर की है, जिसमें उन्होंने दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट से अपनी हार को चुनौती दी है।

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को इस सीट पर वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था।

भाजपा ने राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीतकर चुनाव में प्रमुख शक्ति के रूप में उभरकर सामने आई। भाजपा ने भी कलकत्ता हाईकोर्ट में छह चुनाव याचिकाएं दायर की हैं।

टीएमसी की आठ और भाजपा की छह याचिकाओं को मिलाकर विधानसभा चुनाव से संबंधित कुल 14 चुनावी याचिकाएं अब तक दायर की जा चुकी हैं।

इस चुनाव में टीएमसी ने 291 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और दार्जिलिंग, कुर्सियांग तथा कालिम्पोंग की तीन पहाड़ी सीटें अपने सहयोगी भारतीय गोरखा जनतांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोड़ दी थीं।

291 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली टीएमसी केवल 88 सीटें जीत सकी जबकि उसे 203 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के शानदार प्रदर्शन के अलावा कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी ने दो-दो सीटें जीतीं। वहीं, सीपीआई (एम) और ऑल इंडिया सेकुलर फ्रंट ने एक-एक सीट हासिल की।

टीएमसी के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि अधिकांश पराजित उम्मीदवारों ने कानूनी लड़ाई से दूरी बनाई क्योंकि उनके पास चुनावी अनियमितताओं के आरोपों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं थे।

एक अन्य वरिष्ठ टीएमसी नेता ने भी कहा कि अधिकांश हारने वाले उम्मीदवारों ने अदालत में चुनाव याचिका दायर न करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वे चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकते थे।

--आईएएनएस

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