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चीन की आर्थिक वृद्धि का एशिया और दुनिया पर बड़ा असर: आईएमएफ अधिकारी

बीजिंग, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्थानीय समय के अनुसार, 12 से 18 अक्टूबर तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक समूह का 2026 का वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित हुआ।
 

बीजिंग, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्थानीय समय के अनुसार, 12 से 18 अक्टूबर तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक समूह का 2026 का वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित हुआ।

इस दौरान आईएमएफ के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को दिए एक साक्षात्कार में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर के पूर्वानुमान में बदलाव के कारणों को समझाया। उन्होंने कहा कि चीन ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं और उसकी अर्थव्यवस्था का एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ पूरी दुनिया पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

साक्षात्कार के दौरान चाइना मीडिया ग्रुप की संवाददाता ने उनसे पूछा कि आईएमएफ ने अपनी हालिया एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रिपोर्ट में इस क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 4.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

इसके जवाब में श्रीनिवासन ने कहा कि इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारक हैं। पहला, ऊर्जा संकट का असर। इससे विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा था, लेकिन समय के साथ उन्होंने इन चुनौतियों के अनुसार खुद को ढाल लिया है।

दूसरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से हो रहा विकास है। इसका अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अलग-अलग स्तर पर असर पड़ा है। आईएमएफ ने आर्थिक वृद्धि के अपने पूर्वानुमान में जो बदलाव किया है, उसमें एआई के तेजी से विस्तार का प्रभाव भी शामिल है।

तीसरा कारक व्यापार है। पहले आशंका जताई जा रही थी कि टैरिफ और अन्य कारणों से वैश्विक व्यापार पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा, लेकिन वास्तव में व्यापार ने काफी लचीलापन दिखाया है। इन तीनों कारकों को ध्यान में रखते हुए आईएमएफ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है।

श्रीनिवासन ने आगे कहा कि चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस क्षेत्र के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उसकी हिस्सेदारी आधे से अधिक है। वहीं, वैश्विक आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान करीब एक-तिहाई है। ऐसे में चीन की आर्थिक स्थिति का असर न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ता है।

उन्होंने बताया कि आईएमएफ के पहले किए गए कुछ अध्ययनों के मुताबिक, चीन की आर्थिक वृद्धि दर में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर क्षेत्र की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर करीब 0.3 प्रतिशत का प्रभाव पड़ता है। इसलिए, एशिया की अर्थव्यवस्था और उसके विकास की चर्चा चीन के बिना पूरी नहीं हो सकती।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

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