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चीन के साथ व्यापार और संवाद दोनों जरूरी, शी जिनपिंग का भारत दौरा अहम : विजय कलंत्री

मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर डब्ल्यूटीसी मुंबई के चेयरमैन विजय कलंत्री ने कहा कि यह दौरा व्यापारिक और राजनीतिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ 160 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है, हालांकि 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का ट्रेड डेफिसिट भी है। कलंत्री ने कहा कि ब्रिक्स यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर निर्भरता कम कर आपसी व्यापार बढ़ाने का प्रतीक है और जिनपिंग के दौरे पर सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर वार्ता होगी।
 

मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर डब्ल्यूटीसी मुंबई के चेयरमैन विजय कलंत्री ने कहा कि यह दौरा व्यापारिक और राजनीतिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ 160 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है, हालांकि 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का ट्रेड डेफिसिट भी है। कलंत्री ने कहा कि ब्रिक्स यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर निर्भरता कम कर आपसी व्यापार बढ़ाने का प्रतीक है और जिनपिंग के दौरे पर सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर वार्ता होगी।

विजय कलंत्री ने कहा, "चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हमारे प्रधानमंत्री के बुलावे पर भारत आ रहे हैं। दूसरी बात, वे ब्रिक्स कॉन्फ्रेंस के लिए आ रहे हैं। ब्रिक्स कॉन्फ्रेंस सभी देशों की एक बड़ी एकता का प्रतीक है। हमें लगता है कि ब्रिक्स के अंदर व्यापार बढ़ना चाहिए। आज, ब्रिक्स बैंक भी चीन में है, जो इसमें एक बड़ा प्लेयर है। चीन हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 160 बिलियन से ज्यादा व्यापार करते हैं। करीबन 50 बिलियन से ऊपर ट्रेड डेफिसिट है। चीन भारत से ज्यादा माल नहीं लेता है। हम कोशिश कर रहे हैं कि हमारा उनके साथ व्यापार बढ़े। राजनीतिक और व्यापारिक तौर पर चीन के साथ भारत की एंगेजमेंट बहुत जरूरी है। सीमा को लेकर हमारा विवाद भी है। जब राष्ट्रपति जिनपिंग यहां आएंगे, अलग-अलग मुद्दों पर वार्ता होगी।"

उन्होंने कहा कि 12 देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आ रहे हैं। ब्रिक्स एक बहुत बड़ा समूह है। ब्रिक्स इसलिए बना क्योंकि हम सिर्फ यूरोपीय देशों और उत्तरी अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं। हमने एक-दूसरे के साथ अपना ट्रेड बढ़ाया है।

वहीं, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र के. देओलंकर ने कहा, "यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षण होने जा रहा है। शी जिनपिंग छह साल बाद भारत आ रहे हैं। यह महत्वपूर्ण है कि चीन और रूस के प्रमुख, प्रधानमंत्री मोदी के साथ होंगे। इन तीनों देशों का अपना महत्व है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला रूस द्वारा नियंत्रित है। रूस वैश्विक कच्चे तेल उत्पादन का 10 फीसदी हिस्सा रखता है। चीन दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित करता है। भारत सेवाओं, मानव संसाधन और फार्मास्यूटिकल्स की आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित करता है। जब ये तीन देश एक साथ आ रहे हैं, तो यह बहुत ही महत्वपूर्ण और निर्णायक घटनाक्रम होने जा रहा है।"

उन्होंने कहा कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो इस तरह का कूटनीतिक संतुलन बना रहा है क्योंकि हमें भरोसा है कि हमारी विदेश नीति स्वायत्त निर्णय लेने पर आधारित है। हम चाहते हैं कि विदेश नीति के फैसले लेने में हमारी स्वायत्तता बनी रहे। और इसीलिए हमें अमेरिका, रूस, यूक्रेन, ईरान और इजरायल के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। हमारा एजेंडा अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाना है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के सवालों पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, "उन्होंने जो सवाल उठाए हैं, वे प्रासंगिक हैं। वे एक अर्थशास्त्री भी हैं और इन मामलों से जुड़े रहे हैं। ब्रिक्स आज अस्तित्व में नहीं आया है। जब चीन में इसके कृषि मंत्रियों की बैठक हुई थी, तो मैं भी भारत के कृषि राज्य मंत्री के रूप में इसमें शामिल हुआ था। यह एक ऐसा मंच है जिसमें कुछ विकासशील और कुछ विकसित देश जैसे चीन और रूस और भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे अन्य देश शामिल हैं।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम