छोटी-छोटी बातों पर आता है तेज गुस्सा? ज्ञान मुद्रा से पाएं मन की शांति
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, नींद की कमी और मोबाइल-स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता, ये सभी कारण इंसान के स्वभाव में गुस्से को बढ़ा रहे हैं। कई बार लोग चाहकर भी अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाते, और इसका असर रिश्तों, कामकाज और सेहत, तीनों पर साफ दिखाई देता है। ऐसे में योग और ध्यान के साथ-साथ हाथों की कुछ विशेष मुद्राएं भी गुस्से को शांत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
इन्हीं में से एक है ज्ञान मुद्रा, जिसे गुस्से और मानसिक असंतुलन को कम करने में बेहद प्रभावी माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गुस्सा अक्सर तब बढ़ता है जब दिमाग और तंत्रिका तंत्र पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है। मन में नकारात्मक विचार बढ़ने लगते हैं और व्यक्ति हर स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगता है। ज्ञान मुद्रा का नियमित अभ्यास दिमाग को स्थिर करता है और सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाता है। जब व्यक्ति रोज कुछ समय ज्ञान मुद्रा में बैठकर श्वास-प्रश्वास पर ध्यान केंद्रित करता है, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
ज्ञान मुद्रा करने से शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनता है। इस मुद्रा में अंगूठा और तर्जनी उंगली के मिलने से मस्तिष्क से जुड़ी नसों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि यह मुद्रा मानसिक बेचैनी, तनाव और आक्रामकता को कम करने में मदद करती है। जो लोग जल्दी गुस्सा हो जाते हैं, उनके लिए ज्ञान मुद्रा एक प्राकृतिक उपाय माना जाता है। नियमित अभ्यास से मन में ठहराव आता है और भावनाओं पर नियंत्रण बढ़ता है।
सिर्फ गुस्सा ही नहीं, ज्ञान मुद्रा हमारे पूरे शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह मुद्रा याददाश्त को तेज करने में मदद करती है और दिमाग को सक्रिय रखती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों, सभी के लिए यह मुद्रा उपयोगी मानी जाती है। ज्ञान मुद्रा से एकाग्रता बढ़ती है, जिससे व्यक्ति किसी भी काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित कर पाता है। इसके अलावा, यह मुद्रा मानसिक थकान को कम करती है और दिमाग को आराम पहुंचाती है।
नियमित ज्ञान मुद्रा करने से तनाव और चिंता में भी कमी आती है। आजकल कई लोग नींद न आने, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनकी जड़ अक्सर मानसिक तनाव होती है। ज्ञान मुद्रा मन को शांत कर नींद की गुणवत्ता में सुधार करती हैष साथ ही, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी सहायक मानी जाती है, जिससे व्यक्ति बीमारियों से दूर रहता है।
--आईएएनएस
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