चेतेश्वर पुजारा रहाणे की कप्तानी और दरियादिली के मुरीद, मेलबर्न शतक को बताया यादगार
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने अजिंक्य रहाणे के इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद उनकी कप्तानी और दरियादिली की तारीफ की। उन्होंने 2020 में मेलबर्न के मैदान पर हुए बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहाणे की मैच जिताऊ सेंचुरी को उनके चरित्र को परिभाषित करने वाला पल बताया।
रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। उन्होंने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। रहाणे ने टेस्ट में 38.46 की औसत से 5077 रन बनाए, जिसमें 12 शतक शामिल हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 35.26 की औसत से 2962 रन बनाए और इस दौरान 3 शतक लगाए।
रहाणे ने टी20 इंटरनेशनल में 113 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 375 रन बनाए। उन्होंने छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें से चार में जीत मिली और दो मैच ड्रॉ रहे। इसके अलावा वह 2015 वनडे वर्ल्ड कप और 2014 व 2016 टी20 वर्ल्ड कप टीमों का भी हिस्सा रहे। रहाणे के शानदार करियर और उनके साथ यादगार पार्टनरशिप को याद करते हुए पुजारा ने दबाव में शांत रहने और बिना किसी अहंकार के टीम को लीड करने की उनकी काबिलियत की तारीफ की। खासकर तब, जब एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद भारत ने 2020/21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।
पुजारा ने 'ईएसपीएन क्रिकइंफो' के लिए अपने कॉलम में लिखा, "अगर आप अजिंक्य रहाणे को एक इंसान, खिलाड़ी, व्यक्तित्व, लीडर और टीम मैन के तौर पर समझना चाहते हैं, तो 2020 में बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी सेंचुरी देखें। रहाणे का वह शतक उनके चरित्र को परिभाषित करने वाली पारी थी।"
पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने आगे कहा, "यह बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का दूसरा टेस्ट था, इससे ठीक पहले वाले हफ्ते में एडिलेड में भारत की टीम 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी। विराट (कोहली) के अपने बच्चे के जन्म के लिए भारत लौटने के बाद रहाणे मेलबर्न में टीम की कप्तानी कर रहे थे। दबाव था, लेकिन रहाणे ने बैटिंग करते समय इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया। वह बस अपना खेल खेलते रहे। हम विकेट गंवा रहे थे, लेकिन वह डटे रहे और आखिरकार उन्होंने अपना शतक पूरा किया। मेरे लिए यह दबाव में खेली गई सबसे अच्छी पारियों में से एक थी। एक कप्तान के तौर पर टीम की अगुवाई करना और यह दिखाना कि ऐसी परिस्थितियों में कैसे बैटिंग की जाती है।"
अहम खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में रहाणे की सबको साथ लेकर चलने वाली लीडरशिप स्टाइल का ज़िक्र करते हुए पुजारा ने बताया कि कैसे मुंबई के इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने सीनियर खिलाड़ियों को टीम के युवा सदस्यों को गाइड करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, "रहाणे ने हमसे कहा कि हम युवा खिलाड़ियों से जैसे चाहें वैसे बात कर सकते हैं और उन्हें जो भी सलाह देना चाहें, दे सकते हैं। इससे ऐसा माहौल बनता है जहां हर किसी की बात सुनी जाती है और भले ही आप लीडरशिप रोल में न हों, फिर भी आप योगदान दे रहे होते हैं। एक कप्तान के तौर पर उनकी खूबी चीजों को बहुत आसान रखना था। टीम में कौन सबसे अच्छा है, इसे लेकर कोई ईगो नहीं था। सब कुछ इस बात पर केंद्रित था कि सभी खिलाड़ियों से बेस्ट प्रदर्शन कैसे निकलवाया जाए।"
--आईएएनएस
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