चंद्रशेखर आजाद ने विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- इन्हें भाजपा से नहीं, नई लीडरशिप से डर
जौनपुर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस बार यूपी में मजबूती से अकेले चुनाव लड़ेगी और 45 प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है, जल्द सैकड़ों नाम सामने आएंगे। उन्होंने इंडिया गठबंधन और विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें भाजपा से नहीं, बल्कि दलित-पिछड़े वर्ग से आने वाली नई लीडरशिप से डर लगता है और वे भाजपा को हराना ही नहीं चाहते।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यूपी में चुनाव की तैयारी बहुत मजबूत है, क्योंकि 2022 के बाद पूरे यूपी में हम चुनाव उस तरह से नहीं लड़ पाए। पार्टी और प्रदेश नेतृत्व, सभी की चिंताएं थीं कि इस बार मजबूती से लड़ा जाए। पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए और इस संविधान विरोधी ताकतों से लोहा लेने के लिए हम लोगों ने 45 प्रभारी घोषित कर दिए। हमने कुछ काम दिए थे कि इस तरह का काम करके अपनी लोकप्रियता साबित करो, तो फिर आपको अवसर देंगे। बाकी संगठन अपना काम कर रहे हैं, तो वो रिपोर्ट 20 तारीख तक सबमिट होगी। हो सकता है नए सैकड़ों प्रभारी जो हैं, पार्टी घोषित करे।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि 2017 में बीजेपी की सरकार आई, तो इनके खिलाफ एक गठबंधन भी लड़ा। लेकिन, ये हार गए। ये लोकसभा का चुनाव भी बहुत बुरी तरह से हारे। फिर 2022 में चुनाव हुआ, तो भी एक गठबंधन बना, लेकिन वो भी हार गए। इसका मतलब ये जो दोनों अलायंस थीं, ये पर्याप्त नहीं थीं भाजपा को हराने के लिए। भाजपा का जो वोट शेयर था, वो ज्यादा था। तो एक बड़े अलायंस की आवश्यकता है जो भारतीय जनता पार्टी को हरा दे।
उन्होंने आगे कहा कि मैं चाहता था एक बड़ा विस्तृत अलायंस बने, लेकिन मुझे नहीं लगता किसी की ऐसी मंशा है, क्योंकि असल में उनको डर बीजेपी से नहीं है, इस बात से डर है कि कोई नया व्यक्ति आएगा तो फिर वो उनकी राजनीति कमजोर हो जाएगी। बहुत सारे लोग तो इसी बात को सोच के रात को सो भी नहीं पाते। जो भाजपा को हराने की बात करते हैं, वो पूरे प्रदेश को, देश को छोड़कर, नगीना के लोकसभा चुनाव में जाके दो-दो बार बड़ी-बड़ी सभाएं करते हैं। उस दिन ही मुझे पता लग गया कि ये भाजपा को नहीं हराना चाहते। ये तो कमजोर वर्गों की कोई मजबूत लीडरशिप न आ जाए, ये उसके पीछे पड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मैं पूरे विपक्ष पर सवाल खड़ा कर रहा हूं, क्योंकि ये एक गठबंधन है जो कह रहे हैं कि हम हरा देंगे। आप भी यही हैं, मैं भी यही हूं, देख लेना। जंतर-मंतर पर बच्चे सड़कों पर बैठे थे, तो कौन उनके लिए पूरी रात बारिश में बैठा रहा तीन रात तक? आपने देखा कभी कि प्रधानमंत्री के घर का घेराव हुआ? पिछले 12 साल में देखा आपने? क्या जरूरत पड़ गई ऐसी? क्योंकि आंदोलन चल रहा था और हम लोग मजबूती से लड़ रहे थे। फिर सबको लगा कि अब बड़े से बड़ा काम करना पड़ेगा।
--आईएएनएस
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