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चंबल की भूमि उपजाऊ, टिकाऊ और कमाऊ: सीएम मोहन यादव

भिंड, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भिंड को एक बड़ी सौगात देते हुए कहा कि चंबल की भूमि उपजाऊ भी है, टिकाऊ भी है और कमाऊ भी। भिंड जिले के औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की चौथी नई यूनिट का शुभारंभ मुख्यमंत्री यादव ने किया।
 

भिंड, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भिंड को एक बड़ी सौगात देते हुए कहा कि चंबल की भूमि उपजाऊ भी है, टिकाऊ भी है और कमाऊ भी। भिंड जिले के औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की चौथी नई यूनिट का शुभारंभ मुख्यमंत्री यादव ने किया।

कंपनी ने यहां 450 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। इस तरह अब एशिया की सबसे बड़ी साबुन फैक्ट्री मालनपुर में स्थापित हो गई है। इससे क्षेत्र में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।

इस मौके पर मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि अतीत में भिंड ने खराब पक्ष भी देखा है। लेकिन, आज ये पूरा अंचल बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश-देश बदल रहा है। भिंड तो पूरी तरह एक अलग ही प्रकार का क्षेत्र है। यहां तो हनुमान जी भी डॉक्टर के रूप में रहते हैं।

उन्होंने चंबल में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि आज इस चंबल की भूमि उपजाऊ भी है, टिकाऊ भी है और कमाऊ भी है। दो महीने से भी कम समय में प्रदेश में खुलने वाली यह तीसरी यूनिट है। इससे पहले 1500 करोड़ का गुना सीमेंट प्लांट और 3500 करोड़ का शिवपुरी प्लांट स्थापित हो चुके हैं।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमने केवल एमओयू नहीं किए, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारा। आज यहां स्थापित होने वाली इंडस्ट्री एशिया का सबसे बड़ा साबुन का उद्योग है। यहां प्रति मिनट 4000 साबुन बनेंगे। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक घरानों के माध्यम से कई घरों में रोशनी होती है। सुख-समृद्धि का मार्ग निकलता है। आज 450 करोड़ की नई सौगात मिल रही है। मेड-इन-एमपी और फेथ-इन-एमपी की मिसाल तैयार हो रही है।

उन्होंने कहा कि जितने भी एमओयू होते हैं, उसका दस फीसदी ही धरातल पर उतरता है। लेकिन, मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जहां 30 फीसदी से ज्यादा निवेश धरातल पर उतरा है। 10 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश अलग-अलग तरीके से मूर्त रूप ले रहा है। कई फैक्ट्रियों ने अपना उत्पादन भी शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश की विदेशी निर्यात क्षमता बढ़कर अब 76 हजार करोड़ हो चुकी है। यहां कोई समुद्र नहीं है, लेकिन हमारे उत्पाद 7 समंदर पार पहुंच रहे हैं।

--आईएएनएस

एसएनपी/एएमटी