Aapka Rajasthan

चंबल अभयारण्य क्षेत्र में रेत खनन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश, राज्य सरकारों को दी चेतावनी

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में हो रही गैर-कानूनी रेत खनन की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों को तुरंत पालन करने वाले निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस संवेदनशील क्षेत्र में अवैध रेत माइनिंग को पूरी तरह रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाए।
 
चंबल अभयारण्य क्षेत्र में रेत खनन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश, राज्य सरकारों को दी चेतावनी

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में हो रही गैर-कानूनी रेत खनन की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों को तुरंत पालन करने वाले निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस संवेदनशील क्षेत्र में अवैध रेत माइनिंग को पूरी तरह रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाए।

कोर्ट की मुख्य चिंता इस क्षेत्र के नाजुक पर्यावरण और लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे घड़ियाल तथा डॉल्फिन की सुरक्षा को लेकर है। अवैध खनन न केवल वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वनकर्मियों की जान को भी खतरे में डाल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकारें इस क्षेत्र में अवैध रेत खनन के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर वाई-फाई से लैस उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाएं। इन कैमरों की लाइव फीड की निगरानी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वन विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

अगर किसी भी जगह अवैध खनन की गतिविधि नजर आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत टीम भेजकर कार्रवाई करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को इस बात की विस्तृत जांच करनी होगी कि सभी जरूरी जगहों पर कैमरे ठीक से लगाए गए हैं या नहीं।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पायलट आधार पर यह व्यवस्था शुरू करने को कहा है कि रेत खनन में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों और वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाई जाए। इससे इन वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन पर नजर रखी जा सकेगी और अवैध गतिविधियों को आसानी से ट्रेस किया जा सकेगा।

कोर्ट ने राज्य सरकारों को चेतावनी दी कि अगर इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। यह मामले में कोर्ट ने पहले भी मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किए थे।

--आईएएनएस

वीसी